नवगछिया : अक्षय तृतीया यानी 29 अप्रैल को इस बार दमदार कारोबार होना तय है। दरअसल, पिछले साल अक्षय तृतीया पर शादी-ब्याह का शुभ मुहूर्त नहीं था। लिहाजा, कारोबार भी सिमट गया था। इस बार लग्न रफ्तार में है।
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शुभ कार्यो के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन हैवैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहते हैं। ग्रंथों के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यो का फल अक्षय होता है। इस दिन को सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन का बड़ा ही महत्व है। यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन बिना मुहूर्त के भी किया गया कोई भी शुभ कार्य सफल होता है। पंडित राजेश मिश्र बताते हैं कि यदि इस दिन विधि विधान से पूजा की जाए तो निश्चय ही साधक पर ईश्वर की कृपा बरसती है।

इस दिन मा लक्ष्मी व श्रीहरि विष्णु को सफेद पुष्प चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए। सफेद पुष्प के रूप में यदि आप सफेद गुलाब और कमल का प्रयोग करें तो यह आपके लिए बहुत ही शुभ होता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, वस्त्र आभूषणों की खरीदारी आदि से संबंधित पूजा में भी आप विधि का खासतौर से ख्याल रख सकते हैं।
लक्ष्मी-नारायण की पूजा से मिलती समृद्धि
शास्त्रों के मुताबिक, अक्षय तृतीया के दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान कर भगवान लक्ष्मी नारायण की विधि विधान से पूजा करनी चाहिए। इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराया जाना बहुत ही शुभ व कल्याणकारी माना गया है। इस दिन आपको नए वस्त्र और आभूषण धारण करने चाहिए। इस दिन की सफल पूजा के बाद आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
भगवान विष्णु का हुआ था अवतरण
कहते हैं कि ब्रह्म जी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इसे अक्षय तिथि कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु का नर-नारायण के रूप में अवतरण वैशाख मास की अक्षय तृतीया को हुआ था। भविष्य पुराण के अनुसार इस तिथि की गणना युगादि तिथियों में होती है। सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ भी इसी तिथि को हुआ था। भगवान परशुराम का भी अवतरण इसी दिन हुआ था। इस तिथि को बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन किया जाता है और लक्ष्मी-नारायण के दर्शन किए जाते हैं। इस तिथि को बिना पंचाग देखे कोई भी शुभ व मागलिक कार्य किए जा सकते हैं।

