भागलपुर: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा ने किसानों के लिए महत्वपूर्ण मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। विश्वविद्यालय के अनुसार 5 अगस्त तक दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में मौसम का मिजाज बदला रहेगा। इस दौरान कई क्षेत्रों में गरज-चमक, तेज हवा और हल्की बारिश होने की संभावना है, जबकि गया और नवादा के कुछ इलाकों में भारी वर्षा भी हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार धान की रोपाई के बाद फसल इस समय शुरुआती विकास अवस्था में है। ऐसे में मौसम में होने वाला बदलाव और कम वर्षा किसानों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान के खेतों में खरपतवार तेजी से फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे फसल की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

5 अगस्त तक ऐसा रहेगा मौसम

बीएयू सबौर की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार 5 अगस्त तक दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में आसमान में बादल छाए रहेंगे। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ आंधी और हल्की वर्षा होने की संभावना है। वहीं गया और नवादा जिले के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है।

तापमान और हवा का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 90 प्रतिशत और दोपहर में 60 से 70 प्रतिशत रहने की संभावना है। दक्षिण-पूर्व दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है।

धान के खेतों में बढ़ा खरपतवार का खतरा

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण धान के खेतों में खरपतवार तेजी से फैल सकते हैं। खरपतवार धान के पौधों से पोषक तत्व, पानी और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार धीमी हो जाती है और उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से खेतों में वायु संचार बेहतर रहता है, मिट्टी की नमी बनी रहती है और पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं।

किसानों के लिए BAU सबौर की सलाह

बीएयू सबौर ने जिन खेतों में धान की रोपाई 5 से 7 दिन पहले हुई है, वहां खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 500 से 600 लीटर पानी में निम्न में से किसी एक खरपतवारनाशी का छिड़काव करने की सलाह दी है—

  • ब्यूटाक्लोर – 3.0 लीटर प्रति हेक्टेयर
  • प्रेटिलाक्लोर – 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर
  • पेंडीमेथालिन – 3.0 लीटर प्रति हेक्टेयर

समय पर इन दवाओं का प्रयोग करने से शुरुआती अवस्था में ही खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है और फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।

नियमित निगरानी रखने की अपील

ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. बीरेंद्र कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान के अनुसार कृषि कार्य करें और खेतों की नियमित निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि बदलते मौसम के बीच समय पर खरपतवार नियंत्रण और फसल की देखभाल से धान की बेहतर पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है।

दक्षिण बिहार के किसानों के लिए अगले दो दिन मौसम और खेती, दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में मौसम विभाग और बीएयू सबौर की सलाह का पालन करना किसानों के हित में होगा।

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By न्यूज़ डेस्क

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