भागलपुर : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय अपने विभिन्न कॉलेजों में होने वाली परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए ठोस कदम उठाने जा रहा है। छात्र आधुनिक संचार तकनीक को परीक्षा हॉल के अंदर ले जाएंगे लेकिन वह काम नहीं करेगा। क्योंकि परीक्षा हॉल के बाहर जैमर लगा होगा।
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– क्या है यूजीसी का गाइड लाइन

यूजीसी ने अपने गाइड लाइन में कहा है कि देश के सभी विवि परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए जैमर का प्रयोग कर सकते हैं। जैमर की क्षमता ज्यादा ना तो वह सिर्फ परीक्षा केंद्र के अंदर ही कार्य करे। इससे आम लोगों को भी किसी तरह की परेशानी नहीं होगी साथ ही कदाचार करने वाले छात्र अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाएंगे। यूजीसी द्धारा तय की गई दो कंपनी से जैमर खरीदा जा सकता है। कानून का पालन करते हुए इसे विवि अपने यहां लगा सकती है।
-एसएम कॉलेज में लगा है जैमर
एसएम कॉलेज परिसर के अंदर एक वर्ष पूर्व जैमर लगाया गया है। इसका प्रयोग कॉलेज परीक्षा के दौरान करता है। इसके प्रयोग से कॉलेज में आधुनिक संचार के दम पर कदाचार करने का कोई प्रयास सफल नहीं हो सका है।
– नकल से परेशान है विश्वविद्यालय
तिलकामांझी भागलपुर विवि अपने यहां होने वाले परीक्षा में कदाचार से परेशान है। दो साल पहले मेडिकल परीक्षा के दौरान महाविद्यालय में एक छात्र को मोबाइल के सहारे चोरी करते हुए पकड़ा गया था। वहीं कई सामान्य स्नातक परीक्षा में भी कई छात्रों को परीक्षा के दौरान आधुनिक संचार के माध्यम से चोरी करते पकड़ा गया था।
– मोबाइल रखने में होती है परेशानी
छात्र परीक्षा हॉल के अंदर जाने से पहले मोबाइल वीक्षक के पास जमा करते है। मोबाइल की संख्या ज्यादा हो जाती है। इसे तीन घंटे तक सुरक्षित रखना अपने आप में कठिन हो जाता है। कई बार छात्रों का मोबाइल गिर कर टूट भी जाता था। इस परेशानी से निपटने के लिए विवि प्रशासन ने आदेश दिया है कि कोई भी परीक्षार्थी अपने साथ मोबाइल नहीं लाएगा।
कोट –
सोच सकारात्मक है। जैमर लगाने के लिए संबंधित कंपनी से इस पर होने वाले खर्च के बारे में जानकारी ली जा रही है।

