पटना : मैट्रिक के परीक्षार्थियों को पास करने के लिए ग्रेस अंकों के साथ-साथ फर्स्ट व सेकेंड डिवीजन के लिए भी पांच-पांच अंकों का ग्रेस मिलेगा. वहीं, अगर कोई परीक्षार्थी 75% अंक लाता है, लेकिन किसी विषय में पासिंग मार्क्स से 10% कम अंक आये हैं, तो उसे उस विषय में पास माना जायेगा और फर्स्ट डिवीजन ही घोषित किया जायेगा.
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राज्य सरकार ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है. मैट्रिक परीक्षा में अब तक किसी एक विषय में फेल होने पर पांच अंक और दो विषयों में फेल होने पर तीन-तीन अंक ग्रेस के रूप में दिये जाते थे, लेकिन नये प्रावधान करते हुए इस साल मैट्रिक परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों को एक विषय में फेल होने पर आठ अंक और दो विषयों में फेल होने पर चार-चार अंक ग्रेस मार्क्स के रूप में दिये जायेंगे. इंटरमीडिएट की तरह मैट्रिक का भी रिजल्ट ज्यादा खराब न हो, इसको लेकर राज्य सरकार ने ये बदलाव किये हैं. मैट्रिक के छात्र-छात्राओं को ये ग्रेस अंक इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं के तर्ज पर दिये जायेंगे.

इंटर काउंसिल के विघटन के बाद से ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति इंटरमीडिएट और मैट्रिक परीक्षा का आयोजन करती है, लेकिन दोनों की ग्रेस मार्क्स देने की प्रक्रिया अलग-अलग थी. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के सचिव अनूप कुमार सिन्हा ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव आरके महाजन को ग्रेस मार्क्स में बढ़ोतरी को लेकर प्रस्ताव दिया था.

मालूम हो कि कि इंटर की कदाचारमुक्त परीक्षा व मूल्यांकन में सख्ती से इस बार रिजल्ट का प्रतिशत गिरा है. इंटर कॉमर्स का रिजल्ट 70 फीसदी से ऊपर रहा, लेकिन साइंस और आर्ट्स का रिजल्ट 39% से भी नीचे रहा है.
वही राज्य के हाइ व पल्स टू स्कूलों की शिक्षा के रोडमैप का ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है. इसका प्रेजेंटेशन सोमवार को शिक्षा मंत्री डॉ अशोक चौधरी के सामने किया जायेगा. शिक्षा मंत्री के सुझाव व सहमति के बाद इसी सप्ताह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने इसका प्रेजेंटेशन होगा और उनकी मंजूरी के बाद माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा के रोड मैप को लागू किया जायेगा.
ब्लू प्रिंट में माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा में सुधार के लिए तैयार किये गये शॉर्ट, मीडियम व लांग टर्म प्लान पर चर्चा होगी. जिन स्कूलों में किसी विषय के शिक्षक नहीं होंगे, वहां नियुक्ति होने तक स्थानीय स्तर पर एडहॉक पर शिक्षक नियुक्त कर पढ़ाई करायी जा सकेगी. इसमें संबंधित स्कूल के रिटायर्ड शिक्षकों को प्राथमिकता दी जायेगी. वहीं, हाइ-प्लस टू स्कूलों में कई विषयों के नियोजित शिक्षक नहीं मिल रहे हैं. ऐसे में नियमित वेतनमान वाले शिक्षकों की बहाली की जा सकेगी. शिक्षा के सुधार को लेकर स्कूलों के शिक्षक-प्रधानाध्यापक से लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी व जिला शिक्षा पदाधिकारी की भी जिम्मेवारी तय की जायेगी.
तिमाही, छमाही व वार्षिक परीक्षा के आधार पर शिक्षकों की ग्रेडिंग भी होगी. शिक्षक नियमित रूप से स्कूल आये और बच्चों को पढ़ाई इस पर प्रधानाध्यापक नजर रखेंगे और हर दिन की उपस्थिति बीइओ कार्यालय में जमा करायेंगे. वहीं, बीइओ, डीपीओ व डीइओ हर नियमित रूप से स्कूलों का औचक निरीक्षण करेंगे. इस दौरान वे बच्चों से बातचीत कर पढ़ाई के साथ-साथ शिक्षकों की नियमित उपस्थिति की भी जानकारी लेंगे
