भागलपुर : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर अपने कारनामे के कारण चर्चा में है। इस बार स्नातक परीक्षा में लव लेटर लिखने वाले बांग्ला भाषी छात्रों को 60 फीसद से अधिक अंक दिए गए हैं। इतना ही नहीं लव लेटर लिखने वाले कई छात्र तो प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हो चुके हैं। मामला सामने आने पर विवि के परीक्षा बोर्ड ने मातृभाषा को छोड़कर अन्य विषयों की परीक्षा में बांग्ला व उर्दू में लिखने पर रोक लगा दी है।
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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के छात्र नामांकन लेते हैं। दलालों के माध्यम से नामांकन लेने वाले अधिकांश बांग्ला भाषी छात्रों को यह पता नहीं होता है कि उनका नामांकन किस विषय में हुआ है।

अगर छात्र मनोविज्ञान विषय में नामांकन लेता है तो कॉलेज द्वारा उनका रजिस्ट्रेशन भूगोल विषय में करा दिया जाता है। ऐसे में छात्रों को यह पता नहीं चल पाता है कि उन्हें किस विषय में परीक्षा देनी है। जब छात्र परीक्षा देने पहुंचते हैं तो उन्हें मनोविज्ञान की जगह भूगोल विषय का प्रश्नपत्र थमा दिया जाता है। मनोविज्ञान विषय की तैयारी कर परीक्षा देने पहुंचे छात्र भूगोल का प्रश्नपत्र देखते ही चकरा जाते हैं और कॉपी में बांग्ला भाषा में लव लेटर सहित अनाप-शनाप लिखने लगते हैं। लेकिन मजेदार बात यह है कि विवि में बांग्ला विषय के जानकार नहीं रहने के कारण छात्रों को 60 फीसद से ज्यादा अंक दे दिए जा रहे हैं।

