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नवगछिया : भारत डिजीटल इंडिया का दावा कर रहा है तो दूसरी तरफ नवगछिया के श्रीपुर में डायन के अंधविश्वास में दादा पोतो को आग के हवाले कर दिये जाने की घटना ने पूरे ईलाके को झाकझोर कर रख दिया है. मालूम हो कि आग के हवाले कर दिये गये वृद्ध चंद्रदेव सिंह और उसके तीन वर्षीय पोते संजीत कुमार को इसलिए आग के हवाले कर दिया गया कि चंद्रदेव सिंह की पत्नी पर डायन होने का आरोप लगाया गया था. जउतिया के दिन चंद्रदेव सिंह की पत्नी कोसी स्नान करने के क्रम में गणेश सिंह की पोतोहू और विनोद सिंह की पत्नी को परंपरा के अनुसार सिंदुर लगाया था. इसके बाद कहा जा रहा है कि विनोद सिंह की पत्नी पर भूत सवार हो गया. इसी कारण पिछले दिनों आरोपियों
ने खींच कर बिंदू देवी को नवगछिया नगर पंचायत के श्रीपुर निवासी वार्ड पार्षद माहिल सिंह के घर पर ले जाया गया था.
बिंदू देवी को भूत को भगा देने को बोला गया. बिंदु देवी ने जब इस तरह की किसी भी जानकारी से इनकार कर दिया तो आरोप है कि सबों ने मिल कर बिंदू देवी को परिवार का सफाया कर देने की धमकी दी थी फिर उसे भी मार देने की धमकी दी गयी थी. इस बात को बिंदू देवी ने अपने पुत्र अमृत कुमार और अन्य परिवार के सदस्यों से छुपा लिया था. चूकि अमृत चंडीगढ़ में रह कर टाइल्स घिसाई का कार्य करता है और वह उस वक्त घर पर नहीं था. दस दिन पहले ही अमृत घर आया है. यह बात सामने आ रही है कि बिंदू देवी ने उक्त बात को अपने पति चंद्रदेव सिंह को बता दिया था. चंद्रदेव सिंह सीधे साधे व्यक्ति थे. इसलिए मामले को हल्के से लिया और उसने न तो अपने पड़ोसी और न ही किसी मित्र को यह बात बतायी.

पहले हुई रौशनी, फिर चीखों से कांप गया था श्रीपुर
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि रात के बारह बजे उन्होंने देखा कि अंधेरे में कुछ लोग चहलकदमी कर रहे हैं. वे किसी को पहचान नहीं पाये. लेकिन एका एक देखा कि तेज रौशनी हुई और चीख पुकार मच गयी. सभी चंद्रदेव सिंह के दरवाजे के उस झोपड़ी की तरह बढ़े जहां से चीखने की आवाज और रौशनी आ रही थी. ग्रामीण पास पहुंच गये थे लेकिन आग की लौ इतनी प्रचंड थी कि लोग पास नहीं जा पा रहे थे. करीब सात से आठ मिटन बाद बच्चे के चीखने की आवज बंद हो गयी लेकिन वृद्ध चंद्रदेव सिंह जोर जोर से चीख ही रहे थे. लोगों ने आनन फानन में पानी डाल कर आग पर काबू किया तो दोनों को उस झोपड़ी नुमा खुले कमरे से निकाला गया. जानकारी दी गयी है कि चंद्रदेव सिंह अपने दरवाजे पर अपने पोते और पुत्र अमृत सिंह के बारह वर्षीय साले के साथ सोये हुए थे.
जब अपराधियों ने पेट्रोल छिड़का तो अमित जग गया लेकिन दादा पोते की निंद खुल नहीं सकी और एका एक जब अपराधियों ने माचीस की तीली जला कर फेंक दिया तो अमित भाग निकला और मच्छरदानी में फंस जाने की वजह से दादा और पोता बुरी तरह से झुलस गये. ग्रामीणों व परिजनों के अनुसार दोनों को तत्काल इलाज के लिए नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल ले जाया गया जहां से दोनों को बेहतर ईलाज के लिए भागलपुर रेफर किया गया. रात में ही पोते संजीत कुमार की मौत हो गयी थी.

