नारायणपुर:  ये मामला भागलपुर के नारायणपुर प्रखंड के बलाहा गाँव की है, जो बाजार में हैं । आजादी के 71 वर्ष बाद भी आज समाज के अंदर सामंती विचार व्याप्त है। ये अलग बात है कि हिंदुत्व की, राष्ट्रीयता की और भारत माता की जय कहने वाले के कान इस तरफ खड़े नहीं होते । क्योंकि इनके ऐजेंडा में पूँजीपतियों, सामंतो, और सत्ता का गठजोड़ होता है जो शोषण और अन्याय इनकी जनक है । बात यहाँ से होती है कि श्रवण मल्लिक सूरज मंटू मल्लिक के यहाँ बाहर से कुछ गेस्ट आते हैं । इन लोगों को चाय पिलाने के लिए चाय दुकान ले जाते हैं जहाँ चाय दुकानदार इन लोगों को प्लास्टिक के कप में चाय देता है । गेस्ट ने कहा चाय इसमें नहीं बल्कि सीसे के गिलास में चाय दें । जो कि नहीं दिया गया । कारण पूछने पर कहा गया यहाँ डोम को अलग से पन्नी वाले कप में ही दिया जाता है ।

इस पर गेस्ट ने कहा इतनी घृणा जिस समाज में होता हो वहाँ मैं अपने बेटी का शादी कैसे करूँगा । बनी बनाई बात बिगाड़ गया और शादी टूट गया । नीतीश कुमार हो या लालू यादव या रामविलास पासवान इन्हौंने राजसत्ता की कुर्सी को बचाने के लिए वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया है । इस घटना से आक्रोशित होकर तथा अपनी प्रतिष्ठा और आने वाली पीढ़ी के सम्मान के लिए 8/12/17 को अनुमंडल पदाधिकारी तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को इस बाबत सूचना देते हुए न्याय माँगा और जिसने भी महादलित परिवार का अपमान किया था उन सभी को नामजद किया । जिसमें कुछ दुकानदार और अन्य लोग शामिल हैं ।

पुलिस ने सभी नामजद आरोपित से ₹500/- भ्रष्टाचार के रूप में वसूल लिया । मामला जस का तस रह गया । मल्लिक समाज के लोगों ने निराश होकर अखबार का सहारा लिया बातें अखबार में आई तो सोशलिस्ट यूवजन सभा व सोशलिस्ट पार्टी के साथियों ने घटना स्थल तथा पीड़ित लोगों से मिलकर बातचीत की । सच्चाई की खोजबीन की। जबकि हिन्दुत्व के नाम पर सत्ता हासिल करने वालों ने भी वोट का एकिकरण किया किन्तु समाज के इस बहुपरति जाति आधारित हिंसा और शोषण का खात्मा कैसे हो इस पर कभी भी काम नहीं किया न ही इसके ऐजेंडा में हैं । छानबीन में कई तरह की बातें सामने आई जिससे सरकार की झूठी दावों को पर्दाफाश होता है ।

70 परीवार रहते हैं जबकि एक भी परिवार को नहीं मिला है सरकारी जमीन । जिस जमीन पर अभी ये महादलित लोग रहते हैं, वो जमीन के बदले जमीन मिला है । पीने का साफ पानी नहीं गंदगीऔर गरीबी रोजगार में सिर्फ़ सूप डलिया बनाना या लोगों के घरों की गंदगी को ढोना ।
टोला सेवक बच्चों को पढ़ाने की कोशिश करता है लेकिन बिहार की सरकारी स्कूलों की हालात ये है कि बच्चों को दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक किताब नसीब नहीं है और सरकार सात निश्चय और कानून की राज पर अपनी पीठ थपथपाने में लगी है।

सोशलिस्ट यूवजन सभा के राष्ट्रीय महासचिव ने आरोप लगाते हुए कहा कि असल में ये लोग गरीबी का मजाक उडाते है। जहाँ दलितों महादलितों के शुभ चिंतक कहलाने वाले बड़े नेता बिहार के हो और वो सत्ता में बैठे हो । वो असल में इनलोगों के नाम पर सिर्फ़ राज करता है । अपने समाज के हितों के लिए कुछ भी नहीं करते है । वहीं महादलित समाज के साथ एक बैठक हुई । जिसमें निर्णय लिया गया कि हमारे सम्मान के साथ हो रहे अन्याय के लिए जिस जगह आंदोलन करना पड़ेगा हम सब करेंगे ।

मौके पर सोशलिस्ट पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष मिंटू शर्मा सोशलिस्ट यूवजन सभा के साथी सूरज कुमार श्याम सक्सेना सहित ग्रामीण में राजू मल्लिक निर्मल मलिकनरेश डोम निरंजन मलिक मंटू मल्लिक आदि उपस्थित थे ।

गौतम कुमार प्रीतम की रिपोर्ट

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By Rishav Mishra Krishna

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