नदियों से विलुप्त हो रही दुर्लभ ‘बघार’ मछली खगड़िया के बागमती में मिली है। करीब एक क्विंटल वजन वाली यह बघार मछली दुर्लभ श्रेणी में आती है। इस मछली के मिलने से जहां मत्स्य संसाधन विभाग खुश हैं, वहीं पुन: स्थापना के लिए आशा की किरणें जगी है।
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बता दें कि चौथम प्रखंड के बागमती नदी में मछुआरे को दैत्याकार एक बड़ी मछली मिली। इसका विशालकाय शरीर देख पहले तो मछुआरे डर गए। लेकिन फिर अन्य मछुआरों की मदद से काफी मशक्कत के बाद इसे बाहर निकाला गया। इसके बाद इसकी पहचान हुई। हालांकि, करीब एक क्विंटल वजन वाली बघार मछली की मौत पानी से बाहर आने के तुरंत बाद ही हो गई।
जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि बागमती नदी में दुर्लभ बघार मछली मिलना सुखद खबर है। नदियों में लगातार प्रदूषण बढ़ने व भौतिक परिवर्तन के कारण इसकी संख्या लगातार कम हो रही थी। यह विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गई थी। लेकिन फिर इसके अचानक मिलने से आशा जगी है। अब इसके संवर्द्धन व संरक्षण की दिशा में काम होगा। वे इसकी जानकारी विभाग को भी दे रहे हैं।

हिमालय से निकलने वाली नदियों में मिलती हैं बघार मछली
विशेषज्ञ बताते हैं कि हिमालय से निकलने वाली नदियों में पाई जाने वाली बघार को ज्वाइंट केट फिश कहा जाता है। जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि इनका वजन ढाई क्विंटल तक होता है। नदियों में आए भौतिक परिवर्तन के कारण इसकी संख्या में भारी गिरावट आई है। अब यह यदा-कदा ही देखने को मिलती हैं। वह भी छोटे आकार दो-तीन किलो तक की ही होती हैं।
खगड़िया के बागमती में एक क्विंटल की बघार मछली का मिलना यह साबित करता है कि यहां इस प्रजाति की और भी मछलियां हैं, अब इस मछली को संरक्षित व संवर्द्धित करने की जरूरत है। बघार मछली का वैज्ञानिक नाम बैगेरियस है।

