अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ से प्रभावित होकर भागलपुर की कुछ महिलाएं भाव्या के नेतृत्व में सस्ती दर पर सैनेटरी पैड बनाने की राह पर चल पड़ी हैं।
दरअसल भागलपुर के पटलबाबू रोड की भाव्या ने पैड बनाने की मशीन लगाई है जो बिहार-झारखंड की पहली मशीन है। भाव्या के साथ गांव की 10 महिलाओं की टीम इस काम में लगी हैं। जल्द ही ये सैनेटरी पैड गांव की महिलाओं के बीच पहुंचने लगेगा। भाव्या ये पैड मात्र ढाई रुपए में इसे उपलब्ध कराएंगी।
भाव्या के अनुसार, पीरियड्स के समय अब भी गांव-कस्बों की युवतियां और महिलाएं अक्सर कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। ऐसा करने से चर्म रोग समेत कई तरह के इंफेक्शन का खतरा रहता है। मशीन लगाने वाली भाव्या ने बताया कि शहर में जो महंगी कीमत के पैड मिलते हैं वह गरीब महिलाओं के लिए नहीं हैं।
कुछ करने की तमन्ना खींच लाई भागलपुर
पटल बाबू रोड की रहने वाली प्रवीण सिंह कुशवाहा की बेटी भाव्या ने माउंट कार्मल से हाई स्कूल, देहरादून के बेलहम गर्ल्स हाई स्कूल से इंटर और सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से बैचलर ऑफ मैनेजमेंट स्टडी की पढ़ाई की है। भाव्या के अनुसार, वो बहुत ऊंची सैलरी पर मुंबई की बड़ी कंपनी में काम करती थीं, लेकिन अपने इलाके की ग्रामीण महिलाओं के प्रति कुछ करने की तमन्ना उन्हें भागलपुर खींच लाई।

बायोडिग्रेडेबल व प्रदूषण मुक्त होगा पैड
कोयंबटूर के अरुणाचलम मुरुगनाथम ने 2010 में सिर्फ साढ़े तीन लाख की लागत से यह मशीन बनाई थी। यही मशीन उन्होंने लगाई है। जबकि दूसरी कंपनियों की मशीनें तीन करोड़ से ज्यादा की आती हैं। इस मशीन से बना पैड बायोडिग्रेडेबल व प्रदूषण मुक्त है। यह आसानी से जमीन के अंदर गल भी जाता है। यह वुडपल्प पर आधारित है।
ग्रामीण महिलाओं को मिलेगा रोजगार
कोयंबटूर के इंजीनियर जे. कनन ने पैडमैन फिल्म की शूटिंग के दौरान तीन माह तक हीरो अक्षय कुमार को पैड बनाने की तकनीक बताई थी। भाव्या ने बताया कि उनने पिता प्रवीण सिंह कुशवाहा के सहयोग से जे. कनन एक फरवरी को भागलपुर आकर ग्रामीण इलाकों की 10 महिलाओं को पैड बनाने की ट्रेनिंग दे चुके हैं भाव्या ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को भी इस रोजगार से जोड़ा जाएगा। फरवरी के अंतिम समय में कई गांवों में भी इस मशीन को लगाने की योजना है।


