अगस्त से मधेपुरा निर्मित देश का सबसे पॉवरफुल पहला विद्युत इंजन भारतीय रेल की मालगाड़ियों को रफ्तार देने लगेगी। 12 हजार हॉर्स पावर की इस पहले विद्युत इंजन का फिलहाल सहारनपुर में आरडीएसओ द्वारा इंजन का ट्रायल किया जा रहा है। इससे पूर्व यहां भी कई प्रकार की टे¨स्टग ट्रायल की जा चुकी है। अब सहारनपुर में ट्रायल की सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसका रेलवे में इस्तेमाल किया जा सकेगा। आरडीएसओ के ट्रायल में सफल होने के बाद रेलवे को इस्तेमाल से पहले मुख्य संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की हरी झंडी लेनी पड़ेगी।

आरडीएसओ एवं सीआरएस की हरी झंडी मिलते ही रेलवे इसका इस्तेमाल फ्रेट कॉरिडोर में करना प्रारम्भ कर देगी। ट्रायल की समाप्ति के बाद इंजन का लोड व रन ट्रायल होगा। ट्रायल के दौरान इंजन को इसकी अधिकतम गति सीमा में पूरे लोड के साथ चलाकर परखा जाएगा। इसके बाद लोड ट्रायल के दौरान से ही इंजन का इस्तेमाल फ्रेट कॉरिडोर में होने लगेगा। मधेपुरा निर्मित इंजन के सहारे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की गुड्स ट्रेन को चलाया जाना है।

800 इंजन का होना है निर्माण

फ्रांस की एल्सटॉम नामक कंपनी एवं भारतीय रेलवे की संयुक्त साझेदारी वाली कंपनी द्वारा 2028 तक 800 रेल इंजन का मधेपुरा में निर्माण किया जाना है। फिलहाल अभी एक इंजन का निर्माण हो चूका है। जबकि दूसरे इंजन के एसेंब¨लग का कार्य चल रहा है। अगले वर्ष तक और चार रेल इंजन मधेपुरा फैक्टरी से बनाकर दिया जाएगा। इसके बाद 2020 में 35 इंजन एवं 2021 में 60 इंजन बनाकर सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद प्रत्यके साल 100 इंजन बनाई जाएगी।

फ्रेट कॉरिडोर में होगा इंजन का इस्तेमाल

मधेपुरा में तैयार विद्युत इंजन का इस्तेमाल भारतीय रेल द्वारा मालगाड़ियों के लिए अलग से बनाई जा रही फ्रेट कॉरिडोर में किया जाएगा। 82 हजार करोड़ रूपये खर्च कर तैयार किये जा रहे ईस्टर्न-वेस्टर्न फ्रेट कॉरिडोर में इस इंजन का इस्तेमाल होना प्रारम्भ होगा। फ्रेट कॉरिडोर रेलवे की अति महत्वकांक्षी योजना है। सिर्फ मालगाड़ियों के परिचालन के लिए रेलवे ने फ्रेट कॉरिडोर बनाया है। फ्रेट कॉरिडोर में मालगाड़ियों के चलना प्रारम्भ होने के बाद वर्तमान रेलवे ट्रैक पर सिर्फ यात्री ट्रेन चलाई जा सकेगी।

अब तक की सबसे पॉवरफुल इंजन

मधेपुरा में तैयार विद्युत रेल इंजन देश का पहला हाई स्पीड इंजन है। इस इंजन से भारतीय रेलवे स्पीड एवं माल ढोने के मामले में चीन के समकक्ष होगी। इस इंजन से छह हजार टन तक की वजनी मालगाड़ियों को अधिकतम 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलाई जानी है। वैसे भविष्य में इसकी रफ्तार को 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक किया जा सकेगा। मौजूदा समय में भारतीय रेलवे के पास उपलब्ध रेल इंजन से ऐसा होना संभव नहीं है। अभी फिलहाल भारतीय रेल की गुड्स ट्रेन में 6000 हॉर्स पावर की इंजन का इस्तेमाल होता है।

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By न्यूज़ डेस्क

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