नवगछिया – गुरु दीपक के समान तेज है. वहीं गुरु भक्ति ही दीपक का तेल हैं. जिनके मात्र स्मरण से सारे संशय के अंधकार खत्म हो जाते हैं. गुरु वो मृदंग हैं जिसके बजते ही अनाहद नाद शुरू हो जाते हैं. गुरु वो ज्ञान है जिसके मिलते ही पांचों तत्व एक हो जाते हैं. गुरु वो दीक्षा हैं जो सही मायने में योग्य गुरु के द्वारा ही मिलती हैं तो जीव इस जगत से पार हो जाते हैं. गुरु वह नदी हैं जो निरंतर बहती हैं. गुरु प्रभु का जप स्मरण करने से हमें सत चित आनन्द की प्राप्ति होती हैं.

शुक्रवार को चरण पदुकापुजन, गुरु पूजन के साथ ही हजारो हजार की संख्या में महिला एवं पुरूष ने परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज से आशीर्वाद लेकर प्रसाद के साथ महाप्रसाद ग्रहण किया. सुबह पांच बजे से चार लाइनो में भक्त गण कतार मे थे. वही दर्जनो नामचीन संगीत कलाकार ने एक से बढकर एक भक्ति गायन से भक्त जनो को झुमने पर मजबुर कर दिया. साथ ही दुसरे धर्म मंच पर विद्वान आचार्यो ने गुरु शिष्य की महिमा के साथ गुरु पूर्णिमा के महत्व पर चर्चा करते हुए मानव जीवन में गुरु के ज्ञान के बिना सफलता नही मिल सकती है.

इस क्षेत्र मे स्वामी जी के अवतरण के साथ ही संतो के शुन्यता पट गई. ईलाके के लोगो के साथ भक्त अहलादित है. गुरु शिष्य की अनुपमा छटा देखने को मिली इस पावन अवसर पर बनारसी लाल सर्राफ महाविद्यालय में गुरु शिष्य की अनुपम छटा देखने को मिला. गुरू दर्शन के साथ भक्त गण एक दूसरे से गले मिलकर आपसी प्रेम का इजहार किया. इस मौके राज्य के सभी जिले के साथ अन्य प्रदेशो से स्वामी जी के अनुयायी शिरकत किए. श्री शिव शक्ति योग पीठ एवं सेवार्थ के सैकडो की संख्या में सेवा दल भक्त जनो की सेवा में तत्पर्य है. वहीं फूलो की नगरी बेंगलुरू से पांच भक्त गण ने फूलो का माला गुरु जी के चरणो में समर्पित किया.

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By Rishav Mishra Krishna

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