मेरे सभी सम्मानित नियोजित शिक्षकों साथियों को ( पूर्व MLC प्रत्यासी) नीतेश कुमार यादव का सादर प्रणाम।
जैेसा कि हम सभी देख रहे हैं सुप्रीम कोर्ट में “समान काम समान वेतन” की सुनवाई की महज तीन दिन ही शेष हैं और राज्य सरकार व केन्द्र सरकार दोनों सत्ता सुख की बेसुधावस्था में ऐसे पड़ी हुई है मानो वो आपके दोहण और शोषण की पराकाष्ठापूर्ण नीति में राई – रत्ति भर भी संशोधन करने को इच्छुक नहीं हैं

साथ ही साथ इन्हें ये भी आकाशवाणी मिल गई है कि उनकी इस नियत और नीति के विरुद्ध बिहार में कोई धीमी सी आहट भी सुनने को नहीं मिलेगी और ऐसा हुआ भी और हो भी रहा है लेकिन मैं आज हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी एवं बिहार के मुख्यमंत्री जी दोनों को, मैं अति स्पष्ट स्वर में विनती के साथ चैतावनी भी दें रहा हूं कि केन्द्र और राज्य सरकारें लम्बे समय से धारण किए हुए अपने अड़ियल रवैए का त्याग करके नियोजित शिक्षक साथियों को उनका संविधान वर्णित मौलिक अधिकार यानी समान काम समान वेतन देने की घोषणा करें वर्ना सिपाही विद्रोह की तरह बिहार में शिक्षक विद्रोह होगा जिसकी ऐतिहासिक आग़ाज़ मैं करुंगा।

दोनों सरकारें और सभी शिक्षक नेता और शिक्षक संघ के नेता ये बात स्पष्ट सुन लें कि राजनीति में मेरा पदार्पण सत्ता सुख भोग हेतु नहीं हुआ है मैं “मणसा वाचा कर्मणा” नियोजित शिक्षकों के लिए ही था और आजीवन बना रहूंगा।

मैं वो व्यक्ति और व्यक्तित्व नहीं जो चुनावीकाल में शिक्षकों को सब्ज़बाग दिखाकर ,वोट बटोरा और सत्ता के आलिशान ,सुखमयी सेज़ पर पांच साल तक कुंभकर्णी नींद्रां में सो गया और जब कभी शिक्षक हितार्थ कोई बात सरकार से करवाने का वक्त आया तो सरकार से सौदेबाजी और नियोजित शिक्षकों से धोखेबाजी की नीति अपना लिया।

मैं इस घटिया और कलुषित राजनीति को मटियामेट करने की चट्टानी इरादों से लवरेज व्यक्ति हूं और मैं वो हर हाल में कर के ही रहूंगा।

नियोजित शिक्षकों के खून पसीने की मेहनत के बदले अल्प वेतन और उसे भी छः सात महीने तक नहीं देना,पर्व-त्योहार तक उनका फांकें में बीताना उसके बाद भी मुख्यमंत्री के मुखारविंद से उनके लिए लोभी और लालची ,अज्ञानी जैसे शब्दों का प्रहार क्या नियोजित शिक्षकों के आत्मा को लहू-लुहान नहीं करता?

दोनों सरकारें सुन लें मैं हर कदम पर नियोजित शिक्षकों के साथ हूं उनकी मुश्किलों को दूर करने हेतु में किसी हद तक जा सकता हूं और कोई भी कूर्बानी देने से मैं पीछे नहीं हटने वाला।

महोदय वक्त बहुत कम है आप महलभोगी है शिक्षक न्यूनतम वेतनभोगी है उनकी मार्मिक स्थितियों को देखने और समझने का प्रयास करें।

अगर उनके मौलिक अधिकार के हनन हुआ तो मैं नियोजित शिक्षकों को अपना नेतृत्व प्रदान करुंगा और मैं आपके साथ भी बगावत करने से पीछे नहीं हटूंगा चाहे इसका अंजाम मेरे लिए कितना भी घातक क्यों न हो उसकी मुझे किंचित भी परवाह नहीं।

केन्द्र सरकार और राज्य दोनों से मैं आशा और विश्वास करता हूं कि शिक्षक के साथ अमानवीय व्यवहार का त्याग करें, उन्हें उनका अधिकार और सम्मान दें।

शिक्षक समाज, और राष्ट्र दोनों का निर्माता होता है इसको समझने और देखने की आवश्यकता है, क्योंकि जब आर्थिक यातनाओं तले कुचल कर शिक्षक का अस्तित्व ही खतरें में है तो वो देश और समाज का निर्माण क्या करेगा?

आये दिन शिक्षक या तो वेतनाभाव में समुचित इलाज नहीं करवा पाने के कारण दम तोड़ रहें हैं या आत्महत्या कर रहे हैं इस लोमहर्षक घटना के जिम्मेदार सिर्फ आप और आप हैं लज्जा आनी चाहिए आपको अपने इस कृत्य पर।

दस प्रंद्रह साल तो आपने शिक्षा और शिक्षक दोनों का ही शोषण किया अब भी आप अपनी क्रुररतापूर्ण नीति का त्याग कर 31-07-018, को शिक्षक हितार्थ फैसला लेंगे ये मेरा आपसे आग्रह है वर्ना मंजिल एक है पर रास्ते अनेक है अनूरोध आंदोलन में तब्दील होना सौ प्रतिशत तय है।
शिक्षक अधिकार लेके रहेंगे। नियोजित शिक्षक जिंदाबाद।

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By न्यूज़ डेस्क

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