जिसने जन्म लिया उसका मरना तो अटल सत्य, शास्त्रों के अनुसार मरने के बाद कुछ लोगों को तो सीधे मोक्ष मिल जाता है तो कुछ की अतृप्त आत्मा भटकते रहती है अर्थात भूत प्रेत बन जाती है । भूत प्रेत शब्द अशरीरी अतृप्त आत्माओं के लिए प्रयोग किया जाता है । यह आत्मा की वह स्थिति है, जबकि शरीर तो नष्ट हो जाए, पर आत्मा संसार से बंधी रहे ।

कहा जाता हैं कि मरने वाले के पहले हाथ-पैर सुन्न होते हैं, फिर शरीर सुन्न होता है, और अंत में मष्तिष्क की चेतना से हृदय का संबंध टूटता है और जीवात्मा शरीर से निकल जाती हैं ।

जब किसी को अचानक चोट, जहर खाने, सांसों के बंद हो जाने, शरीर के जल जाने, किसी दुर्घटना में या किसी अन्य तरीके से मौत होने पर ज्यादातर आत्माएं प्रेत बनती हैं । ऐसी स्थिति में शरीर तो नष्ट हो जाता है किंतु आत्मा शरीर के किसी हिस्से या वहीं आसपास रहती है । साथ ही तृष्णा, कामना, इच्छा आदि भी बनी रहती है, परंतु क्रिया के लिए आत्मा के पास शरीर नहीं होता । अकाल मृत्यु वाली आत्माएं कामनाएं अधूरी रहने पर जीवित लोगों को कष्ट देती है तथा कामनाएं पूरी करने का प्रयास करती है

कहा जाता हैं कि अकाल मृत्यु को प्राप्त पितृ इसीलिए असंतुष्ट होते हैं कि वे देखते हैं कि हम अपना जीवन जी रहे हैं किंतु उनके लिए या उनकी मुक्ति के लिए कुछ नहीं किया जा रहा । इसीलिए अतृप्त आत्माएं किसी के शरीर में प्रवेश कर अपने कार्य कराने का प्रयत्न करती है

अगर कोई आत्मा किसी को परेशान करती है तो ऐसे में भगवान का नाम लेकर उन्हें मुक्त या अपने से दूर किया जा सकता है । जैसे राम, हनुमान, काली, भैरव, गायत्री आदि के मंत्रों के द्वारा या किसी तांत्रिक की सहायता से भूत प्रेतों से छुटकारा पाया जा सकता हैं ।

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By न्यूज़ डेस्क

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