प्रखंड के फरीदपुर सरस्वती टोला प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को एमडीएम (मीड-डे-मील) खाने से 24 बच्चे बीमार हो गये। सभी बच्चों को पेट दर्द, उल्टी के अलावे बेहोशी आने लगी। बच्चों की बिगड़ती स्थिति देख गांव में अफरातफरी का माहौल बन हो गया।
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आनन-फानन में लोगों ने खरीक थाना एवं पीएचसी को मामले की जानकारी दी जिसपर चिकित्सक डॉ. संत कुमार निराला अपनी टीम के साथ स्कूल पहुंचे एवं सभी बीमार बच्चों का उपचार किया। 11 बच्चों की गंभीर स्थिति देखते हुए पीएचसी से एंबुलेंस बुलाकर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। घटना से ग्रामीण काफी आक्रोशित थे एवं इसका जिम्मेदार शिक्षकों को ठहरा रहे थे। मामले में एसडीओ मुकेश कुमार ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिये हैं। उन्होंने बीडीओ, बीईओ एवं थानाध्यक्ष को मामले की जांच कर दोषी को चिह्नित कर प्रतिवेदन समर्पित करने का निर्देश दिया है।
मौके पर पहुंची पुलिस ने पूछताछ के लिए प्रधानाध्यापक एवं स्कूल की तीन रसोइया को हिरासत में ले लिया एवं खाने के नमूने को भी साथ ले गये। मौके पर पहुंचे बीडीओ सुधीर कुमार स्कूल से बच्चों की सेहत की जानकारी लेने मायागंज रवाना हुए।

प्रधानाध्यापक पर बच्चों का आरोप, रोज दिया जाता घटिया भोजन
बच्चों को चावल एवं आलू-चना मिली सब्जी खाने में दी गयी थी जबकि शुक्रवार को पुलाव, तड़का, सलाद के साथ-साथ अंडा या फल देने का नियम है। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक पर आरोप लगाते हुए कहा कभी भी बच्चों को मीनू के अनुसार खाना नहीं दिया जाता है। रोज घटिया खाना दिया जाता है। बच्चों ने कहा कि हमलोगों को कभी भी अंडा या फल नहीं मिलता है। वहीं मौजूद शिक्षकों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
हल्दी डालने से सब्जी पीला के बदले हो गया लाल
बच्चों को दिया गया सब्जी पीलापन के बदले लाल दिख रहा था। रसोइया से ग्रामीणों द्वारा पूछने पर उसने बताया कि गुरुवार को हल्दी पाउडर 250 ग्राम का पाउच प्रधानाध्यापक ने बाजार से खरीद कर लाया था। जिसे सब्जी में देने के बाद पीला के बदले लाल हो गया। ग्रामीण हल्दी में ही गड़बड़ी रहने के कारण बच्चों की हालत बिगड़ने की बात बता रहे थे।

फूड प्वायजनिंग के कारण बच्चे हुए बेहोश
बच्चों का इलाज कर रहे चिकित्सक ने बताया कि फूड प्वायजनिंग के कारण बच्चों की हालत बिगड़ी है। वहीं सभी बीमार बच्चे पेट दर्द, उल्टी के साथ-साथ बेहोशी की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सकों ने बताया कि जांच के दौरान बच्चों की धड़कन तेज पाई गई है। सभी बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद खुले हवा में आराम करने की सलाह दी।

