ओ बैग लगाकर बचाने की कोशिश में जुटे रहे। भागलपुर काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग के कैंपस में बाढ़ का पानी घुस गया। शनिवार दोपहर 12 बजे हॉस्टल आर्यभट्ट के समीप एच-फोर की बाउंडरी की दीवार का कोना गंगा में बह गया। देखते ही देखते मुख्य बिल्डिंग के पीछे गंगा का पानी कैंपस में आ गया। फाइनल ईयर के छात्र उज्ज्वल राज, विक्रम सिंह ने बताया कि सुबह तक कैंपस में इतना पानी नहीं था, लेकिन दोपहर 12 बजे गंगा के बहाव में एच-फोर का बाउंडरी वॉल गिर गया।

इससे पानी का बहाव तेज हो गया। इसकी सूचना पर कॉलेज प्रशासन की तरफ से कटाव रोकने के लिए बालू के बोर रखे गए है। छात्रों ने बताया गंगा का पानी हर दिन बढ़ रहा है। ऐसी स्थित रही तो 2016 की तरफ बाढ़ का प्रकोप कॉलेज कैंपस में आ सकता है। मुख्य गेट के अंदर जाने के रास्ते में बांई ओर के मैदान में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। अब अगर पानी कैंपस में और बढ़ेगा तो कॉलेज का पठन-पाठन बाधित हो सकता है।

एक ग्लास सत्तू से कटा पीड़ितों का दिन, शाम को मिला दोपहर का खाना

ब्लॉक में ठहरे बाढ़ पीड़ितों का शनिवार का पूरा दिन एक ग्लास सत्तु से कट गया। दोपहर का मिलने वाला भोजन शाम में मिला। पीड़ितों दोपहर 12 बजे डिस्पोजल गिलास में पीने के लिए सत्तू दिया गया। रंजदीपुर, बगडेर बगीचा, संतनगर के बाढ़ पीड़ित गोरे लाल मंडल, सुबोध मंडल, रुदल मंडल, शंकर मंडल, जगबली मंडल, बासुकी नाथ, नंद किशोर मंडल ने आरोप लगाया कि शिविर में जो व्यवस्था होनी चाहिए वह नहीं मिल रही है। सुबह से लोग भोजन के लिए तड़पते रहे। जब बाढ़ पीड़ित खाने के लिए मांग करने लगे तो दोपहर 12 बजे बाढ़ पीड़ितों को एक गिलास डिस्पोजल में सत्तू दिया गया, जिसमें सत्तू कम और नमक-पानी ज्यादा था। दोपहर का खाना शाम में दिया गया।

बच्चे खान बनाने की जगह पर दिन भर बैठे रहे, लेकिन तीन बजे तक खाना तैयार नहीं हुआ। छोटे बच्चे दूध के लिए परेशान हैं, लेकिन अब तक दूध नहीं मिला है। पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। सीओ विक्रम भास्कर झा ने कहा कि व्यवस्था के कारण दोपहर के खाने में लेट हुई है, लेकिन रात का भोजन समय पर दिया गया। बाढ़ पीड़ितों को कोई दिक्कत न हो इसके लिए दवा की भी व्यवस्था की गई। चार महिलाओं को प्रसव कराने के लिए स्वास्थ्य केंद्र सबौर में भर्ती कराया गया है, ताकि कोई कोई दिक्कत न हो। उन्होंने बताया कि रविवार से बच्चों के लिए दूध की भी व्यवस्था की जाएगी।

इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल परिसर में भी घुसा बाढ़ का पानी। हॉस्टल आर्यभट्ट एच 4 की बाउंड्री का हिस्सा टूटकर बहा।

इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल परिसर में घुसा बाढ़ का पानी।

देर रात एनएच-80 पर बढ़ा पानी, जीओ बैग लगा बचाने में जुटे अफसर

शहर के कई मुहल्लों तक पहुंचा बाढ़ का पानी, शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा है खतरा

सबौर के खनकित्ता इंग्लिश मोड़ के पास बाढ़ के पानी के दबाव से एनएच क्षतिग्रस्त हो गया है। एनएच पर आवागमन बंद करने के लिए वहां बैरियर लगाया गया है, बावजूद वाहनों का आवागमन जारी है। इसको लेकर सदर एसडीओ आशीष नारायण ने एसएसपी आशीष भारती को पत्र के माध्यम से पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति करने का अनुरोध किया है। इसमें कहा गया है कि खनकित्ता इंग्लिश मोड़ के पास बाढ़ के पानी का दबाव सड़क पर होने के कारण एनएच क्षतिग्रस्त हो गया है और पानी का रिसाव भी हो रहा है। यह वाहनों के परिचालन के लिए खतरनाक है। सबौर के सीओ ने भारी वाहनों व अन्य वाहनों के परिचालन के नियंत्रण के लिए सड़क की दोनों तरफ बैरियर लगवाया है।

सबौर में एनएच 80 पर बाढ़ के पानी के दबाव को राेकने के लिए 40 फीट का चदरा लगाया गया है। लेकिन इससे कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है।

एनएच पर कटाव का खतरा बरकरार : खानकित्ता और घोषपुर के बीच करीब एक किलोमीटर तक पानी का दबाव बना हुआ है। एनएच पर जगह-जगह पानी का रिसाव हो रहा है। इससे कटाव का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने भारी वाहन व छोटी माल वाहक गाड़ियों पर रोक लगा दी है फिर भी रात में चोरी-छिपे गाड़ियां जा रही हैं। एनएच के कार्यपालक अभियंता राजकुमार ने बताया कि बाढ़ से सड़क को बचाने के लिए कोई आवंटन नहीं मिला है। पूर्व की आवंटित राशि से एनएच को बचाने का काम किया जा रहा है।

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By Rishav Mishra Krishna

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