शहर में टोला सेवक की बहाली के नाम पर जमकर फर्जी फॉर्म बिक रहे हैं। शहर के युवक फॉर्म खरीदकर नौकरी के लिए विभाग का चक्कर काट रहे हैं। जबकि शिक्षा विभाग ने अब तक टोला सेवक की बहाली के लिए रोस्टर तक नहीं बनाया है। मगर शहर के चौराहों पर दुकानदार टोला सेवक की भर्ती का फॉर्म बेचकर लोगों में झूठी उम्मीद पैदा कर रहे हैं। बेरोजगार युवाओं को झांसा देकर शहर में कई जगह धड़ल्ले से फॉर्म बिक रहे हैं।
जिन स्कूलों में टोला सेवक की बहाली होनी है उन्हें ये पता ही नहीं है कि उनके स्कूल में कब और कितने पद पर बहाली करनी है। ऐसे में युवाओं को निराशा हाथ लग रही है। उन्हें वहां से कोई जानकारी नहीं मिलने पर डीईओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। इधर, जिले मे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की रिक्तियों के लिए भी अभ्यर्थी विभाग का चक्कर काट रहे हैं। जिले में 38 कर्मियों के पद खाली हैं।

इन पदों के लिए 2015 में भी रिक्तियां निकली थीं। अभ्यर्थियों ने परीक्षा भी दी थी। मगर अब तक उनकी बहाली नहीं हुई है। अब अभ्यर्थी अपना रिजल्ट लेकर शिक्षा विभाग का चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है जब हमारी परीक्षा हो गई रिजल्ट निकल गया तो हमें क्यों नहीं बहाल किया जा रहा है। वहीं शिक्षा विभाग का कहना है कि इन पदों के लिए 2015 में हुई परीक्षा के आधार पर बहाली स्थगित कर दी गई थी। डीईओ मधुसूदन पासवान ने कहा कि इस बहाली के लिए परीक्षा अभी आयोजित की जाएगी।


