हवाई अड्डा के रन-वे की मरम्मत और एप्रोच रोड के लिए निकला टेंडर रद्द हो गया। दो ठेकेदारों ने टेंडर डाला था। लेकिन तकनीकी कारणों से भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता ने टेंडर रद्द कर दिया। अब भवन निर्माण विभाग की ओर से दो दिन के अंदर दोबारा टेंडर निकाला जाएगा। इसमें रन-वे और वहां तक पहुंचने के लिए सड़क के निर्माण पर 1.95 करोड़ रुपए खर्च किये जाएंगे। इसके लिए दो माह पहले टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अक्टूबर में काम शुरू होना था। लेकिन तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द होने के कारण अब यह समय बढ़ जाएगा। हालांकि विभाग का दावा है क जल्द ही टेंडर निकालकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। चयनित ठेकेदार को माहभर के अंदर दोनों काम पूरा करना है। इसमें 3600 फीट लंबे और 100 फीट चौड़े रन-वे का निर्माण होगा। जबकि मुख्य द्वार से रन-वे तक पहुंचने के लिए सात मीटर चौड़ी सड़क भी बनेगी। अब तक इस सड़क की चौड़ाई करीब 3.5 मीटर है। भवन निर्माण विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर रामाज्ञा कुमार ने बताया कि तकनीकी कारणों से टेंडर रद्द किया गया है। अब दो दिन के अंदर दोबारा से टेंडर निकाला जाएगा।

नई जगह पर हवाई अड्डा को मांगा गया है 200 एकड़ जमीन का प्रस्ताव

डीएम प्रणव कुमार ने सदर अनुमंडल के सभी सीओ को हवाई अड्डा के लिए 200 एकड़ जमीन का प्रस्ताव मांगा है। इसके लिए अब तक एक भी सीओ ने प्रस्ताव नहीं भेजा है। सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय की जमीन पर हवाई अड्डा की संभावना है। लेकिन वहां अड़चन यह है कि जमीन के बीच में ही एक कब्रिस्तान है। इसके लिए वहां से भी अब तक मुकम्मल प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका है। अब संभावना जताई जा रही है कि दुर्गापूजा खत्म हो गई तो सभी संबंधित सीओ जमीन का प्रस्ताव भेजेंगे।

अब तक हवाई अड्डा के विकास पर 1.32 करोड़ रुपए हो चुके हैं खर्च

भागलपुर हवाई अड्डा से घरेलू विमान सेवा शुरू होने की संभावना नहीं है। जबकि उसको लेकर केवल योजना बनाई जा रही है और करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। हवाई अड्डा के विकास के लिए सबसे पहले पूर्व डीएम आदेश तितरमारे के समय योजना बनी। हवाई अड्डा के विकास के लिए बीते डेढ़ साल के अंदर 1.32 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। 34 लाख रुपए से लाउंज का निर्माण हुआ। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया। इसके बाद 98 लाख की लागत से चहारदीवारी की मरम्मत और भव्य गेट का निर्माण किया गया। हालत यह है कि इतने रुपए खर्च किए जाने के बाद भी उसके रख-रखाव व देखभाल की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब यहां से घरेलू विमान सेवा शुरू करने की संभावना नहीं थी तो करोड़ों रुपए क्यों खर्च किए गए।

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By न्यूज़ डेस्क

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