नवगछिया : नवगछिया अनुमंडल की सबसे प्रसिद्ध व प्राचीन मंदिरों में से भवानीपुर की काली मंदिर एक है. रंगरा प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर स्थित माता काली के मंदिर में लगभग 200 से भी अधिक वर्षों से मां काली की प्रतिमा स्थापित होती आ रही है. बालमुकुंद पोद्दार के घर से काली पूजा की प्रथा का प्रारंभ हुआ था. गांव के बुजुर्ग कैलाश पोद्दार और कैलाश यादव के अनुसार कहा जाता है कि पोद्दार परिवार के बच्चों द्वारा खेल-खेल में मां मिट्टी से काली की प्रतिमा बनाई गई.


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तत्पश्चात बच्चों ने किसी एक व्यक्ति का पाठा पकड़ लाया और उस पाठा के गर्दन पर कुश रख कर काली माता का जयकारा लगाते हुए कुश गर्दन पर चला दिया. मां काली के प्रभाव से उस पाठा की गर्दन कट गई. पाठा के गर्दन कटते ही बच्चे पूरी तरह से घबरा गए और बच्चे भागते हुए अपने घरों में जाकर बुजुर्ग से आप बीती कह सुनाई. बुजुर्गों के कहने पर बच्चों ने मां काली की प्रतिमा को गंगा जल में विसर्जित कर दिया.

उसी रात को बालमुकुंद पोद्दार के पिता को मां काली ने स्वप्न में दर्शन देते हुए कहा कि मेरी प्रतिमा गंगाजल से निकाल कर मुझे मंदिर में स्थापित करो और मुझे पाठा का बलि चढ़ाओ. तब से बालमुकुंद परिवार के वंशज द्वारा मूर्ति पूजा प्रारंभ हुई जब वे लोग सही तरीके से पूरी व्यवस्था करने में सक्षम नहीं होने लगे तो ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक मंदिर का निर्माण कराया गया. प्रतिमा स्थापित होने के बाद आज भी बालमुकुंद पोदार के वंशज भूसी पोद्दार के घर से नैन व बलि देने की प्रथा है. वैदिक पद्धति से मां काली की पूजा धूमधाम से होती है. माता काली का दर्शन करने को हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ पड़ती है.

यहां पाठा के अलावे भैंसे की भी बलि दी जाती है

मन की मुराद पूरी होने पर ग्रामीणों व बाहर से आए श्रद्धालुओं द्वारा करीब 1 हजार से भी ज्यादा बलि और लगभग 5 से 7 भैंसे की बलि दी जाती है.

सोने के आभूषण भी चढ़ाए जाते हैं

मान्यता है कि जो भी सच्चे मन से मां काली का सुमिरन कर मुराद मांगते हैं और जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है तो श्रद्धालु सोने व चांदी की बिंदी, पाठा, झांप, नथ, टीका, मुंडमाला, पायल आदि चढ़ावा चढ़ाते हैं. इस वर्ष यम दीप के रात्रि को प्रतिमा स्थापित होगी. वहीं 8 नवंबर को प्रतिमा विसर्जन होगा. प्रतिमा विसर्जन के बाद महाआरती का भी आयोजन होगा. लक्ष्मी पूजा के दिन रात्रि जागरण व 8, 9, 10 नवंबर को महा दंगल का आयोजन किया जाएगा.

पूजा समिति के सदस्यों में पंडित प्रभात झा, हरे कृष्ण झा एवं मंदिर के पुजारी महानंद झा, व्यवस्थापक प्रशांत कुमार उर्फ पिंटू यादव, अध्यक्ष राम जी पोद्दार, मेला आयोजन के सदस्यों में कैलाश यादव, कैलाश पोद्दार, उपेंद्र यादव, सुबोध यादव, सुधीर यादव, हरि किशोर झा, त्रिपुरारी कुमार भारती, विश्वास झा, सुरेश यादव, नागेश्वर यादव, हिमांशु शेखर झा, निरंजन यादव, गोविंद यादव, गोवर्धन पोद्दार, वरुण मिश्रा, पप्पू मिश्रा, कैलाश मंडल, दिनेश यादव सहित कई सदस्य पूजा की संपन्नता को लेकर अपनी भागीदारी निभाएंगे.

By Rishav Mishra Krishna

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