सुपौल : नेपाल के सीमावर्ती इलाके सुपौल में मानव तस्कर हमेशा सक्रिय रहे हैं। यहां शादी, प्यार या नौकरी का झांसा देकर मानव तस्कर बेटियों को बेच देते हैं। हाल में हुए सोनिया कांड ने मानव तस्करी के मामले में पुलिस को आईना दिखाया है। छह महीने पूर्व जिस महिला को पुलिस ने मृत करार दिया, उसके लौटने और इससे पूर्व, गायब होने की कहानी ने पूरी व्यवस्था की कलई खोल दी है। :- कामिनी ने दिया झांसा : बकौल सोनिया, वह पति से झगड़ा करने के बाद सिमराही बाजार आ गईं। एक ऑटो में उसकी भेंट कामिनी से हुई। उस लड़की ने सोनिया को नैहर पहुंचा देने का आश्वासन दिया। इसके बाद उसे बस में बिठाकर कोई नशीली चीज खिला दी गई। सोनिया की आंख खुली तो वह दिल्ली में थी। दिल्ली में उसे कमरे में बंद रखा जाता था।

ससुराल से निकलते समय सोनिया गर्भवती थी। दिल्ली में उसने एक बच्चे को जन्म दिया। उसके बच्चे की विशेष निगरानी की जाती थी। सोनिया को विदेश भेजने की बात कही जाती थी। तस्कर कहते थे कि उसका वीजा बन रहा है। विदेश जाने के बाद उसकी आमदनी तीन लाख रुपये प्रति माह हो जाएगी। :- रिश्तेदार के प्रयास से बची : सोनिया को लाने गए राघोपुर गम्हरिया निवासी उनके मामा ससुर मदन पासवान ने बताया कि लगभग पांच महीने बाद सोनिया ने अपनी ननद को फोन किया। फोन के क्रम में उसकी आवाज तो थी, लेकिन भाषा का टोन बदल गया था।

जिस फोन से उसने बात की थी वह किसी मजदूर का था। मजदूर ने बाद में जगह की जानकारी दी। इंडिया गेट के निकट शनि मंदिर के आसपास सोनिया को रखा गया था। परिजन ने दिल्ली में रह रहे किसी व्यक्ति से पहले सोनिया का पता लगाया। इसके लिए ह्वाट्सएप पर सोनिया का आधार कार्ड भेजा गया। वहां से पुष्टि होने पर परिजन ने दिल्ली पहुंचकर सोनिया को मुक्त कराया। सोनिया जिस गिरोह के चंगुल में फंसी थी, उसका संचालन एक महिला कर रही थी।

हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं पति और ससुर :

सोनिया की हत्या के आरोप में सास को कई माह तक जेल की हवा खानी पड़ी। पति व ससुर अब भी जेल में बंद हैं। इन्हें सोमवार को 164 के बयान के लिए न्यायालय लाया गया। इससे पूर्व, सोनिया ने दो नवंबर को सदर थाना पहुंचकर अपने ¨जदा होने की जानकारी दी थी। राघोपुर थाना क्षेत्र के कोरियापट्टी, वार्ड नं.-6 निवासी जनार्दन पासवान की बेटी व इसी थाना क्षेत्र के बैरदह गांव निवासी रंजीत पासवान की पत्नी सोनिया के बयान और न्यायालय के फैसले पर लोगों की निगाहें टिक गई हैं।

कोसी, महानंदा और सीमांचल के इलाके में मानव व्यापारियों की सक्रियता काफी अधिक है। ये लड़कियों व बच्चों के व्यापार में संलिप्त रहते हैं। इलाके में ऐसे कई मामले उजागर भी हुए हैं। यह इलाका मानव तस्करों के लिए सेफ जोन माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय सीमा, गरीबी, अशिक्षा व बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा का फायदा मानव तस्कर उठाते हैं

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By न्यूज़ डेस्क

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