ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया : बाबा बिशु राउत सेतु और फोर लेन पर गाड़ियां फर्राटा भरती हुई चल रही हैं तो दूसरी तरफ महज एक वर्ष के अंतराल में इलाके में कई बदलाव हुए जो खास कर नवगछिया के तीन पंचायतों खैरपुर दियारा, खैरपुर कदवा, ढोलबज्जा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में कामयाब रहा है. वर्तमान में कोसी दियारा इलाके को देख कर कोई विश्वास नहीं करेगा कि वह कोसी पार का वही दियारा इलाका है जो सिर्फ बदहाली के लिए जाना जाता था. अब नवगछिया के कोसीपार का दियारा इलाका विस्तृत बाजार का शक्ल ले चुका है. लोगों के लिए अब यहां रोजगार के कई अवसर हैं.
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कई उद्योग धंधे का हुआ सृजन
मालूम हो कि पिछले दिनों की बाबा बिशु राउत सेतु का फोरलेन पूरी तरह से बन कर तैयार हो गया है. फोरलेन का निर्माण होते ही कदवा का मिलन चौक एक बाजार में तब्दील हो गया है. यहां तरह तरह की सौ से अधिक स्थायी दुकानें खुल गयी हैं. लगभग रोजमर्रा की सभी सामग्री अब यहां पर उपलब्ध है. लगभग ढ़ाई सौ लोग प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से यहां रोजगार से जुड़े हैं. दूसरी तरफ गोला टोला, प्रताप नगर में भी तरह तरह की दुकानें खुल गयी हैं. कोसी पार में बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती होती थी, पहले लोगों को औने पौने भाव में ही सब्जी बेचना पड़ता था लेकिन अब यहां के लोग आसानी से अपने सब्जी को नवगछिया या भागलपुर के बाजारों तक पहुंचाने में सफल हो रहे हैं.

फोरलेन बन जाने के बाद दूध के धंधे में तेजी आयी है. बड़ी संख्या में लोग पशुपालन से जुड़ गये हैं. विभिन्न डेयरी का वाहन लोगों के घरों तक पहुंच कर दूध खरीद रहे हैं लोग बड़ी संख्या में पशुपालक दूध लेकर नवगछिया या भागलपुर बाजार जा कर बेच रहे हैं. कई लोग वाहनों के परिचालन के धंधे से जुड़ गये हैं तो कई लोग चालक या फिर सहचालक के काम से भी जुड़े हैं. बड़े पैमाने पर झोपड़ियां पक्के के मकान में तब्दील हो रहे हैं. इस कारण गिट्टी बालू और सरिया का कारोबार भी फोर लेने के किनारे काफी मुफीद साबित हो रहा है. दूसरी तरफ तेतरी जीरोमाइल के पास एक मिनी नवगछिया आकार ले रहा है. यहां भी एक बड़े बाजार का सृजन हो चुका है. जिसमें इलाके के बड़े पैमाने के लोग रोजगार से जुड़े हैं.
पारंपरिक खेती में भी हुआ बदलाव
कोसी पार में खेती एक फसली हुआ करती थी लेकिन कोसी की धारा प्रभावहीन होने और गांव के गलियों तक बाजार के पहुंच जाने के कारण पारंपरिक खेती में बड़ी तेजी से बदलवा हो रहा है. अब कोसी पार में बड़े पैमाने पर केले की खेती हो रही है. दूसरी तरफ लोग सब्जियों की खेती भी बड़े पैमाने पर करने लगे हैं. एक समय था मक्के की अच्छी पैदावार हो जाने के बाद भी किसान इसका लाभ नहीं ले पाते थे क्योंकि मक्का बाजार तक पहुंच ही नहीं पाता था लेकिन वर्तमान में किसानों को खेतों पर ही उसके उत्पादों के मूल्य मिलने लगे हैं.

सेतु के लिए दशकों तक जारी रहा था संघर्ष
नवगछिया के तीन पंचायतों की करीब साठ हजार आबादी को सेतु के लिए दशकों तक संघर्ष करना पड़ा है. कभी संघर्ष उग्र हुआ तो कभी लोकतांत्रिक लेकिन पुल बनने की घोषणा तक सघर्ष जारी रहा था. कई आंदोलनों के बाद लोगों पर मुकदमे भी हुए, जो आज तक विचाराधीन है.
लोगों ने कहा
कोसी पार के स्थानीय लोगों कदवा दियारा पंचायत के मुखिया अशोक सिंह, नवीन कुमार निश्चल, मुखिया अजय कुमार, पंकज जयसवाल, जदयू के नेता हितेशचंद्र, युवा जदयू के जिलाध्यक्ष सोनू जयसवाल, संतोष गुप्ता, विक्रम स्वर्णकार आदि ने अलग अलग शब्दों में कहा कि निश्चित रूप से पुल और फोर लेन बन जाने के बाद साकारात्मक बदलाव हुआ है. लेकिन अभी भी स्वस्थ्य, शिक्षा और कई ऐसी मूलभूत सुविधा है जिसकी कमी है. वे लोग इसके लिए भी निरंतर संघर्ष कर रहे हैं.
यह कार्य होना है बांकी
पुल के साथ साथ फोर लेन अब पूरी तरह से बन चुका है. ग्रामीणों की मानें तो अभी भी कार्ब सेंटर, दो सड़क के बीच वाले जगह का सौदर्यीकरण, कदवा हाईस्कूल का चहारदिवारी, बजरंगबली की मूर्ति का निर्माण कार्य, शहीद स्मारक का निर्माण कार्य नियमत: कार्य कर रही ऐजेंशी को करना है.
कहते हैं पदाधिकारी
नवगछिया के अंचलाधिकारी विद्यानंद राय ने कहा कि जल्द ही बचे हुए कार्य की जानकारी ले कर विभिन्न कार्यों को पूरा करवाया जायेगा.
कहते हैं कार्य कर रही ऐजेंशी के पदाधिकारी
कार्य कर रही ऐजेंसी के सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर अभय कुमार सिंह ने कहा कि अब कुछ मामूली काम ही रह गया है जिसे ससमय पूरा कर लिया जायेगा.

