नवगछिया : नवगछिया के नगरह पंचायत के बिंदटोली घाट पर करीब बीस दिन पहले ही पीपा पुल को जोड़ा गया. जब से पीपा पुल जोड़ा गया कोसी नदी में बहने वाला मलवा बिंदटोली घाट पर आ कर जमा हो रहा है. बिंदटोली केदोनों घाटों के बीच कोसी नदी छिछली हो गयी है. इस कारण कोसी की मुख्य धारा बिंदटोली के वितरीत तट हो कर बहती है. बिहपुर नारायणपुर की ओर से आने वाला मलवा पहले बिंदटोली के आगे जाता है. बिंदटोली से आगे कुछ दूर जाने के बाद कोसी की एक धारा विपरीत प्रवाह करते हुए बिंदटोली की तरफ आ जाती है. यही धारा कोसी नदी के मलवे को बिंदटोली घाट के पास जमा कर देती है.
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तरह तरह के मवेशियों के हैं शव
बिंदटोली पीपापुल के पास करीब तीन सौ मीटर के दायरे में जलकुंभी का एक परत बन गया है. इसी जलकुंभी में कई तरह के मवेशियों के शव देखे जा सकते हैं. जानवरों के शवों में गाय, भैंस, बकरी, सूअर आदि के भी शव हैं. कुछशव बोरे में भी बंद है. बिंदटोली के पास कोसी को विकृत करने में पीपा पुल का निर्माण है कराण बिंदटोली के पास कोसी नदी की धारा को विकृत करने में पीपा पुल का उक्त स्थल पर निर्माण ही एक मात्र कारण है. ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष उक्त स्थल पर पीपा पुल नहीं था.

इस वर्ष ग्रामीण स्तर से ठेकेदरों को सलाह दी गयी थी कि पीपा पुल का निर्माण बिंदटोली घाट से दो सौ मीटर हट कर किया जाय. लेकिन घाट के पास पहले से सड़क मौजूद होने के कारण पीपा पुल जोड़ दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि कम से कम छ: माह तक पीपा पुल यहां पर जुड़ा रहेगा. इतने समय तक उनलोगों को सरांध का सामना करना पड़ेगा. ग्रामीण बंदेल राय, सारथ राय, जयप्रकाश राय आदि ने कहा कि पूर्वा हवा बहते ही गांव का हर गांव में लोग सरांध की बदबू से परेशान हो जाते हैं. महामारी फैसलने की भी आशंका है. प्रशासनिक पदाधिकारियों से बिंदटोली घाट से मवेशियों के शवों को हटाने की मांग की है.
कहते हैं सीओ
नवगछिया के सीओ विद्यानंद शर्मा ने कहा कि ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के सहयोग से मवेशियों के शवों को निकालने की व्यवस्था की जायेगी. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने दो दिन पहले कोसी नदी में मवेशियों के शवों के होने की सूचना दी थी लेकिन इस संदर्भ में किसी प्रकार का फंड नहीं रहने के कारण वैकल्पिक व्यवस्था करने की तैयारी की जा रही थी.

