खगड़िया: जिले के सुदूर कन्हैयाचक गांव के किसान हैं समीर कुमार चौधरी। उनकी नर्सरी देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। उसमें दुलर्भ चंदन से लेकर गर्म मसाला तक के पौधे लहलहा रहे हैं। वहां काला शीशम समेत तरह-तरह के पौधे हैं, जिन्हें उचित कीमत देकर आप भी अपने घर-आंगन की शोभा बढ़ा सकते हैं। आज इस नर्सरी की ख्याति दूर-दूर तक है। इससे समीर को अच्छी-खासी आमदनी भी हो रही है।
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समीर के पास खेती की सात-आठ बीघा जमीन है। पारंपरिक खेती करने से बमुश्किल परिवार की गाड़ी चल रही थी। वर्ष 2013 में समीर ने खेती-बाड़ी का स्वरूप बदलने का निर्णय लिया।
ढाई एकड़ में नर्सरी लगाई। नर्सरी भी खास है। इसमें दुर्लभ चंदन से लेकर गर्म मसाला, रेन ट्री, पौली-ट्री, काला शीशम तक के पौधे उपलब्ध हैं। इसके साथ ही आम के 30 किस्में उपलब्ध है। लीची और अमरूद के भी 10 किस्में है। कटहल की भी कई वैरायटी है। आम और कटहल के बारहमासी पौधे भी है।

आज इन पौधों के कारण वाण गंगा नर्सरी खास हो गया है। समीर खास पौधे लखनऊ, देहरादून से लेकर दक्षिण भारत की यात्रा कर जुटाते हैं। कई पौधे स्वयं की नर्सरी में तैयार करते हैं।
समीर कहते हैं- आज इस नर्सरी से पांच-छह लाख सलाना आय हो जाती है। आस-पड़ोस समेत दूर-दराज से किसान और शौकीन लोग पौधे लेने आते हैं। कहा, वर्ष 2020 में जब अगुवानी-सुल्तानगंज महासेतु चालू हो जाएगा, तो यहां से झारखंड तक पौधे भेजेंगे।

