गोपालपुर :  विपिन कुमार ठाकुर, अप्रैल माह में होने वाले संसदीय चुनाव में नवगछिया अनुमंडल में गंगा व कोसी नदी का कटाव से विस्थापित हुए लोगों का पुनर्वास एक अहम मुद्दा बनता जा रहा है. कटाव से विस्थापित हुए ग्रामीणों का आक्रोश सत्ता व विपक्ष के राजनीतिक दलों व पूर्व व वर्त्तमान जनप्रतिनिधियों से है. विस्थापितों के पुनर्वास की बात पूर्व व वर्त्तमान सांसदों ने समय -समय पर विस्थापितों के बीच कह कर चुनावी वैतरणी पार करने में सफलता प्राप्त की. परन्तु कटाव से विस्थापितों के बीच आकर कभी उनका हाल -चाल लेने का समय नहीं निकाला.

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से गंगा व कोसी नदी के कटाव से गोपालपुर, इस्माइलपुर, रंगरा चौक, खरीक, नारायणपुर आदि प्रखंडों के सैकडों गाँव के करीब दस हजार से अधिक परिवार विस्थापित होकर बेघर हो चुके हैं तथा विस्थापित परिवार सडक , तटबंध व रेलवे लाइन के किनारे प्लास्टिक टाँग कर खानाबदोश की तरह रहने को विवश हैं. हजारों एकड उपजाऊ जमीन गंगा व कोसी नदी में समा जाने के कारण कभी समृद्ध परिवार में शुमार आज महानगरों में मजदूरी करने को विवश हैं. हालाँकि विस्थापितों की सही संख्या प्रशासनिक पदाधिकारियों के पास भी उपलब्ध नहीं है. पूर्व डीएम विपिन कुमार की पहल पर रंगरा प्रखंड के कोसी कटाव से विस्थापित कुछ परिवारों को बासगीत पर्चा दिया गया था.

परन्तु आजतक उस जमीन पर विस्थापितों को कब्जा नहीं दिलाया जा सका है. गोपालपुर प्रखंड के बुद्धूचक के विस्थापितों को भी बासीगत पर्चा देने की पहल की गई थी. परन्तु उक्त जगह पर बसने से विस्थापित परिवार ने इनकार कर दिया था. विस्थापित अनिल सिंह, काबुली पासवान, पंकज पासवान आदि ने कहा कि हमलोग तटबंध पर पन्नी टाँग कर रहने को विवश हैं. सरकार की योजनाओं से हमलोग वंचित हैं. ना शौचालय ना सात निश्चय हमलोग अपनी किस्मत पर रोने को विवश हैं.

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By Rishav Mishra Krishna

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