जेपी कॉलेज नारायणपुर के एक पूर्व प्राचार्य वित्तीय अनियमितता और धांधली के दोषी पाए गए हैं। टीएमबीयू के कॉलेज इंस्पेक्टर की रिपेार्ट के आधार पर राजभवन ने उन्हें पांच मामलों में दोषी पाया है। राजभवन के अोएसडी ज्यूडिशियल फूल चंद्र चौधरी ने टीएमबीयू को संबंधित पूर्व प्राचार्य पर चार अप्रैल तक कार्रवाई कर पांच अप्रैल तक रिपोर्ट देने को कहा है। हालांकि पूरे मामले में एक ओर पूर्व प्राचार्य ने चालाकी से काम लिया है तो दूसरी ओर विवि भी कार्रवाई के मामले में सुस्ती दिखा रहा है। पूर्व प्राचार्य से राजभवन ने एक फरवरी को शोकॉज किया था।
पूर्व प्राचार्य ने इसका तो जवाब नहीं ही दिया, इससे पहले कि उन पर कोई कार्रवाई होती, उन्होंने प्रभारी प्राचार्य के पद से ही इस्तीफा दे दिया। इधर, विवि की स्थिति यह है कि फूल चंद्र चौधरी ने पूर्व प्राचार्य पर कार्रवाई करने का निर्देश 19 मार्च को ही जारी कर दिया लेकिन विवि ने अब तक कुछ नहीं किया है। इधर, गड़बड़ी को सामने लाने का दावा कर रहे छात्र नेता शिशिर रंजन सिंह ने आरोप लगाया है कि मामले में विवि पूर्व प्रभारी प्राचार्य पर कार्रवाई करने से पीछे हट रहा है।

टीएमबीयू के कॉलेज इंस्पेक्टर ने की थी जांच
मामला यह है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में कॉलेज इंस्पेक्टर ने जेपी कॉलेज नारायणपुर की जांच की थी। उन्होंने इसकी रिपोर्ट दी थी जो राजभवन को भी भेजी गई, क्योंकि तब राजभवन के आदेश पर कई कॉलेजों की जांच की गई थी। जेपी कॉलेज के मामले में कॉलेज इंस्पेक्टर ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कॉलेज प्रशासन ने उन्हें अग्रिम आय और इसके वाउचर उपलब्ध नहीं कराए थे। सितंबर, अक्टूबर, नवंबर 2018 में कक्षाओं के संचालन का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। आठ जनवरी 2019 को जिस दिन निरीक्षण हुआ था उस दिन शिक्षक और छात्रों की उपस्थिति की जानकारी नहीं दी गई। कॉलेज का नैक से मूल्यांकन नहीं हुआ था और साइंस फैकल्टी में नामांकन बेहद कम था। इस बारे में रजिस्ट्रार अरुण कुमार सिंह ने कहा कि वह दो दिन से बाहर हैं। कार्रवाई को लेकर शनिवार को जानकारी दे पाएंगे।


