कोसी का कहर: 5 साल में 200 परिवार हुए बेघर, अब 500 घरों पर मंडरा रहा खतरा
नवगछिया : कोसी नदी का लगातार बढ़ता कटाव कोरचक्का गांव के अस्तित्व पर संकट बनकर मंडरा रहा है। पिछले पांच वर्षों में करीब 200 परिवार अपना घर-बार गंवा चुके हैं, जबकि अब गांव के लगभग 500 परिवारों के मकान कटाव की जद में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू करने की मांग की है।
200 परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास के इंतजार में
ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमलेंदु अमल ने बताया कि कोसी की तेज धारा पिछले पांच वर्षों में करीब 200 परिवारों का आशियाना निगल चुकी है। विस्थापित परिवार आज भी महदत्तपुर, राजेंद्र कॉलोनी, मुख्य सड़कों के किनारे और रेलवे लाइन के आसपास अस्थायी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इतने वर्षों बाद भी प्रशासन इन परिवारों के स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं कर सका है।
कटाव की जद में आए सैकड़ों घर
ग्रामीणों के अनुसार, कोसी नदी का कटाव लगातार गांव के मुहाने तक पहुंच चुका है। इससे करीब 500 परिवारों की रातों की नींद उड़ गई है। कटाव की जद में सीताराम सिंह, अनिल कुमार सिंह, सुभाष कुमार सिंह, सुबोध कुमार, डब्लू सिंह, जोगी सिंह, सुनील सिंह, हंसदेव सिंह, नरेश सिंह, प्रदीप सिंह, भवेश सिंह और लालू सिंह समेत कई ग्रामीणों के पक्के और कच्चे मकान आ गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हुआ तो कई घर कोसी नदी में समा सकते हैं।
आश्वासन मिले, लेकिन काम नहीं हुआ
ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक एवं ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कोरचक्का को कटाव मुक्त बनाने का वादा किया था। मंत्री बनने के बाद जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम ने क्षेत्र का सर्वेक्षण भी किया, लेकिन इसके बाद कोई स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू नहीं किया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है और गांव पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
तत्काल फ्लड फाइटिंग शुरू करने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून के बीच अब किसी बड़ी परियोजना की शुरुआत संभव नहीं है। ऐसे में गांव को बचाने का एकमात्र विकल्प फ्लड फाइटिंग है। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग और भागलपुर जिला प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित स्थलों पर बोल्डर क्रेटिंग, जियो बैग (बालू से भरी बोरियां) और अन्य आपातकालीन सुरक्षा उपाय युद्धस्तर पर शुरू किए जाएं, ताकि इस वर्ष कोरचक्का गांव को बड़े नुकसान से बचाया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो कोसी का कटाव इस वर्ष गांव के बड़े हिस्से को अपने आगोश में ले सकता है।

