बिहपुर : बिहपुर और खरीक प्रखंड के तटवर्ती इलाकों में कोसी नदी का कटाव विकराल हो गया है। मंगलवार को बिहपुर के गोविंदपुर और कहारपुर में गांव की मुख्य सड़क, खेत, बासा और आम-लीची बागान कोसी में विलीन हो गया। सिंहकुंड में लक्ष्मण साह का घर नदी में समा गया। जबकि सुभाष सिंह, जवाहर सिंह समेत कई ग्रामीणों के घर कटाव के मुहाने पर आ गए हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। इन गांवों में अब दर्जनों घर-बासा और सैकड़ों एकड़ खेती योग्य जमीन कटाव की भेंट चढ़ चुकी है।
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गोविंदपुर और कहारपुर के ग्रामीण सनातन सिंह, श्रीकर सिंह, दिव्यांशु कुमार, पूण्रेन्दू सिंह, मुरारी सिंह, पंकज सिंह, मेदो पासवान, अभिषेक सिंह, अन्नी सिंह आदि ने बताया कि सरकारी महकमा उदासीन बना हुआ है। कुछ दिनों पूर्व राजस्व कर्मचारी स्थिति का जायजा लेने आए थे। सब कुछ लिख-पढ़ कर ले गए, मगर दोबारा नहीं आए और ना ही कटाव से बचाव का कार्य शुरू हुआ। यहां ग्रामीणों की जान आफत में पड़ी है। कटाव के भय से लोग गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं। दर्जनों लोग बेघर हो चुके हैं, जिनके समक्ष खाने-पीने के भी लाले पड़े हैं।


लेकिन, प्रशासनिक अधिकारी किसी की सुध नहीं ले रहे। गोविंदपुर, कहारपुर, मैरचा, रतनपुरा, विशपुरिया, बगजान व चोरहर रिंगबांध पर खतरा मंडराने लगा है। अगर, कोसी की धारा को हरियो दियारा की तरफ मोड़ दिया जाए तो कटाव से काफी हद तक बचा सकता है। लेकिन जल संसाधन विभाग मौन बना है। सिंहकुंड के ग्रामीणों ने बताया कि यहां कटावनिरोधी कार्य बंद कर दिया गया है।

इससे लोगों में विभाग के प्रति काफी आक्रोश है। कटाव पीड़ितों को अबतक कोई सहायता नहीं मिली। मंगलवार को सीआइ ब्रजेश परैया आए और 32 कटाव पीड़ित परिवारों की सूची बनाकर ले गए। पानी के लिए एक चापाकल तक नहीं मिला है। जिला पार्षद गौरव ने पीएचईडी विभाग के कार्यपालक अभियंता से मिलकर कटाव पीड़ितों को मुआवजा समेत अन्य सुविधाएं देने की मांग की।
