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खरीक :  खरीक के ध्रुवगंज दुर्गा मंदिर परिसर में सात दिवसीय भागवत महायज्ञ के छठे वृन्दावन से आये संत परमपूज्य लक्ष्मण दास जी महाराज ने सोमवार को कृष्ण लीला, बाल सखा लीला, गोवर्धन पूजा, रासलीला पर संगीतमय प्रवचन किया. परमपूज्य संत ने प्रवचन श्रोताओं के साथ गंगा प्रलय से निजात पाने के लिए वैदिक मंत्रोचारण के साथ गंगा पूजा और गंगा महा आरती का आयोजन किया.इस अवसर पर गंगा को निर्वाध योग्य बनाने, स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए शपथ ली. प्रवचन करते हुआ परमपूज्य लक्ष्मण दास जी महाराज ने कहा क़ि गंगा मैया पाप नाशिनी है. सभी पापों का नाश करने के लिए गंगा मैया पृथ्वी पर अवतरित हुई. समाज के सभी व्यक्ति श्रेष्ठ बनें भक्ति और आध्यात्म से जुडें. उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव को जीवन जीने का राह दिखाता है. जहां कहीं भी कथा सुनने का अवसर मिले वहां हमें श्रद्धा और उत्साह से कथा श्रवन  करना चाहिए. भागवत महात्म है क़ि अपने जीवन में कोई व्यक्ति एक बार भी भागवत कथा का श्रवण नहीं किया है ऐसे मानव पृथ्वी पर भार स्वरुप होते है. ऐसे लोगों को जीवन में कभी शांति नही मिलती. इस संदर्भ में भागवत में एक कथा का वर्णन है जिनमें खा गया है कि आत्मदेव के पुत्र दूंधकारी ने जीवन में कभी सत्कार्य नही किया. जिस वजह से उसे प्रेत योनि में जन्म लेना पड़ा. प्रेत होकर भी उसने भागवत कथा का श्रवण कियाऔर प्रेत योनि से दुन्धुकारी को मुक्ति मिली. भागवत कथा को प्रेत विनाशिनी कहा गया है. इस अवसर पर ध्रुबगंज के ग्रामीण प्रबुद्धजन और बड़ी तादाद में महिलाएं मौजूद थी.

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