केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के कॉपी मूल्यांकन में एडहॉक (तदर्थ) शिक्षक को नहीं लगाया जायेगा। अगर कोई स्कूल 10वीं और 12वीं के कॉपी मूल्यांकन में एडहॉक शिक्षकों का नाम बोर्ड को भेजा होगा तो उन्हें पांच लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ेगा। इसके लिए बोर्ड ने सभी स्कूलों को जानकारी दे दी है। ज्ञात हो कि 25 फरवरी से कॉपी मूल्यांकन शुरू होगा।

मूल्यांकन के लिए दिशा-निर्देश बोर्ड द्वारा जारी किया गया है। बोर्ड की मानें तो इस बार 10वीं और 12वीं बोर्ड की कॉपी जांचने में केवल नियमित शिक्षक ही भाग लेंगे। बोर्ड ने स्कूलों से नियमित शिक्षकों की सूची भेजने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर स्कूलों ने एडहॉक शिक्षक का नाम भेजा तो पांच लाख जुर्माने के साथ स्कूल की मान्यता भी जा सकती है। बोर्ड की इस नियमावली को सभी स्कूलों को मानना पड़ेगा। बोर्ड की मानें तो एफिलिएशन बायलॉज के नियम संख्या 14.4 के तहत सख्त प्रावधान है कि कॉपी जांच केवल और केवल नियमित शिक्षक ही करेंगे। यह नियम इस बार सख्ती से लागू हो रहा है।

कॉपी मूल्यांकन की पूरी जिम्मेवारी स्कूलों की
बोर्ड की मानें तो ज्यादातर स्कूल 10वीं और 12वीं कॉपी के मूल्यांकन को बहुत ही हल्के में लेते हैं। स्कूल तदर्थ शिक्षकों से कॉपियों की जांच करवाते हैं। इसका असर छात्रों पर सीधा पड़ता है। अंक में उलटफेर हो जाता है। इस कारण इस बार कॉपी मूल्यांकन की पूरी जिम्मेवारी स्कूलों पर होगी। ज्ञात हो कि बोर्ड परीक्षा 15 फरवरी से 30 मार्च तक चलेगा।

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डा. संयम भारद्वाज (परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई) ने कहा- कॉपी मूल्यांकन सही से नहीं होने पर बोर्ड की बदनामी होती है। स्क्रूटिनी में मूल्यांकन पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। इसलिए एफिलिएशन बायलॉज लागू किया गया है।

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By न्यूज़ डेस्क

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