नवगछिया – विगत वर्षों में नि:संदेह नवगछिया में अपराध का पारा गिरा है लेकिन दुस्साहसिक घटनाओं में इजाफा हुआ है. पुलिस के आंकड़ों के अनुसार हत्या और बलात्कार जैसी घटनाओं में कमी आयी तो दूसरी तरफ अनुसुचित जाति जनजाति प्रताड़ना, शराब बरामदगी, डकैती आदि के मामले में इजाफा हुआ है. वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2019 में हत्या की घटनाओं में 23 फीसदी की कमी आयी है. वर्ष 2018 में 26 हत्याकांडों का मामला सामने आये थे तो 2019 में 20 हत्याकांडों के मामले सामने आये हैं. वर्ष 2018 में डकैती के दो मामले आये थे तो 2019 में डकैती के चार मामले सामने आये.
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लूट की घटनाओं में 18 फीसदी तक कमी आयी है. वर्ष 2018 में गृहभेदन की 29 घटनाएं सामने आयी तो 2019 में भी गृहभेदन की इतनी घटनाएं ही सामने आयी हैं. चोरी की घटनाओं में महज दो फीसदी की कमी आयी है. वर्ष 2018 में चोरी की 74 घटनाएं हुई थी तो 2019 में एक कम 73 घटनाएं हुई हैं. साधारण दंगे में आठ फीसदी की कमी है तो भीषण दंगे में 50 फीसदी तक इजाफा हुआ है. बलात्कार की घटनाओं में 64 फीसदी की कमी आयी है. वर्ष 2018 में बलात्कार के 14 मामले में सामने आये थे तो 2019 में पांच मामले ही सामने आये हैं.

आर्म्स एक्ट के मामले में भी नौ फीसदी तक कमी आयी है. एनडीपीएस एक्ट के मामले में 29 फीसदी तक कमी आयी है. शराब बरामदगी और शराब पीने के मामले में 40 फीसदी की बढोतरी हुई है. वर्ष 2018 में 151 ऐसे मामले सामने आये थे तो वर्ष 2019 में 241 मामले सामने आये थे. अनुसुचित जाति जनजाति प्रताड़ना मामले में 57 फीसदी बढ़ोतरी हुई है जो चौकाने वाले आंकड़े हैं. वर्ष 2018 में इससे संबंधित 42 मामले सामने आये थे 2019 में 60 मामले सामने आये हैं. महिला उत्पीड़न के मामले में 31 फीसदी तक कमी आयी है.
मिसलेनियस कांडों में भी कमी आयी 12 फीसदी की गिरावट है. संज्ञेय अपराधों में महज दो फीसदी की कमी आयी है. सड़क हादसों में पांच फीसदी तक कमी आयी है तो सड़क र्दुघटना में मृत्यु की घटनाओं में भी छ: फीसदी तक कमी आयी है. पुलिस पदाधिकारियों की मानें तो नवगछिया पुलिस के लिए वर्ष 2018 और 2019 का तुलनात्मक आंकड़ा संतोषजनक है लेकिन बुद्धिजीवियों ने कहा कि कुछ ऐसे मामलों में बढ़ोतरी हुई है जिससे पता चलता है कि पुलिस की कार्यशैली में व्यापक सुधार की जरूरत है.

