नए वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य के ट्रेजरी पेपरलेस हो जाएगा। राज्य सरकार ने नया ट्रेजरी कोड लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था में सामान्यतः ट्रेजरी में बिल जमा नहीं होगा। सभी बिल और प्रक्रियाएं ऑनलाइन होगी। इससे जहां एक तरफ ट्रेजरी में काम और तेजी से होगा। वहीं पेपरलेस होने से पेड़ कम कटेगा जो पर्यावरण की दृष्टि से सही है।
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नई व्यवस्था के तहत राज्य के सभी ट्रेजरी रिजर्व बैंक के ई-कुबेर पेमेंट सिस्टम से जुड़ जाएंगे। पेमेंट की पूरी प्रक्रिया रिजर्व बैंक के पोर्टल पर ही होगी। इसका लाभ राज्य सरकार को मिलेगा। लेन-देन की राशि दो घंटे के अंदर सरकारी खजाने में चली जाएगी। जबकि अभी इस प्रक्रिया में दो से पांच दिन लग जाते हैं। पैसा बैंक में रह जाता है। कुछ मामलों में महीना भी लग जाता है। इससे सरकार की एक हजार करोड़ से अधिक की राशि बैंक में फंसी रहती है। इस पर सरकार को कोई ब्याज भी नहीं मिलता है।

क्यों जरूरत पड़ी नया ट्रेजरी कोड लाने की?
दरअसल एक अप्रैल 2019 से राज्य में कॉम्प्रिहेंसिव फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफएमएस) लागू किया गया है। राज्य के ट्रेजरी नियमावली में भी नए सिस्टम के अनुसार ही बदलाव किया जाना था। इसके लिए वित्त विभाग ने नया बिहार ट्रेजरी नियमावली बनाई है। यह एक अप्रैल 2020 से लागू होगा। नई नियमावली लागू होने के बाद कोषागार में साफ्ट कॉपी से सारी प्रक्रियाएं चलेंगी। यानी बिल ट्रेजरी लाने की जरूरत नहीं के बराबर होगी।
सबकुछ ऑनलाइन होने से ऑडिट करना आसान
ट्रेजरी की सारी प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से ऑडिट में सहूलियत होगी। एक क्लिक पर ही बिल और दूसरे दस्तावेज उपलब्ध होंगे। महालेखाकर कार्यालय में भी दस्तावेज ले जाने की जरूरत नहीं होगी।

