अाधिकारिक सूत्र बताते हैं कि अधिकतर अंतरजातीय विवाह करने वाले युवा समाज की डर से अपने को छिपा लेते हैं. इस कारण समाज कल्याण विभाग ने अधिकारियों को इस योजना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जिलों में अभियान तेज करने का निर्देश दिया है, ताकि अंतरजातीय विवाह करने वाले लोग खुल कर इस योजना का लाभ ले सकें.
योजना लाभ के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा इसके बाद यह राशि लाभुक के खाते में सीधे पहुंच जाती है.

आवेदन के समय यह देना होगा
- दंपती का आधार कार्ड
- वोटर आइडी
- राशन कार्ड की कॉपी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- पंचायत में निबंधन की कॉपी
- दंपती का ज्वाइंट बैंक अकाउंट
अंतरजातीय विवाह में यह लाभ
- सामान्य व्यक्ति को एक लाख
- अगर एक दिव्यांग हो, तो एक लाख
- अगर दोनों दिव्यांग हो, तो तीन लाख
इन उद्देश्यों से लागू की गयी योजना
राज्य सरकार ने समाज में जातीय भेदभाव के बंधन को तोड़ने और दहेज प्रथा पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के उद्देश्य से इस योजना की शुरुआत की है. कोरोना के कारण इस योजना का लाभ लेने वालों की संख्या थोड़ी कम है.
साथ ही, बहुत लोग डर से भी आवेदन नहीं करते है, लेकिन विभाग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि योजना के प्रति जागरूकता जरूरी है. साथ ही, जो लोग आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें योजना का लाभ समय पर मिले, इसकी जिम्मेदारी भी विभागीय अधिकारियों की ही है.
समाज कल्याण विभाग के निदेशक राजकुमार ने कहा कि अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि लेने के लिए आवेदकों को ऑनलाइन ही आवेदन करना है. आवेदन करने के बाद राशि सीधे उनके खाते में भेज दिया जात है इसके लिए प्रचार-प्रसार बढ़ाया जायेगा.


