कृष्ण जन्माष्टमी सोमवार को है। इस बार वैष्णव व गृहस्थ भी एक ही दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनायेंगे। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्र कृष्ण अष्टमी तिथि, सोमवार रोहिणी नक्षत्र व वृष राशि में मध्य रात्रि में हुआ था। जन्माष्टमी को लेकर मंदिरों व ठाकुरबाड़ि़यों में भी विशेष तैयारी की गयी है।


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रात्रि 10:10 मिनट में अष्टमी ने किया प्रवेश:

पंडित सौरभ कुमार मिश्रा ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी बहुत ही खास है। कई विशेष संयोग भी बन रहे हैं। 30 अगस्त का दिन सोमवार है। अष्टमी 29 अप्रैल को रात्रि 10:10 मिनट में प्रवेश कर गया जो सोमवार को रात्रि 12:24 तक रहेगा। रात में 12: 24 तक अष्टमी है। इसके बाद नवमी तिथि प्रवेश कर जायेगा। इस दौरान चंद्रमा वृष राशि में मौजूद रहेगा। इन सभी संयोगों के साथ रोहिणी नक्षत्र भी 30 अगस्त को रहेगा।

रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश 30 अगस्त को प्रात: 6:49 में हो जायेगा। आधी रात्रि को अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक साथ मिल जाने के कारण जयंती योग का निर्माण होता है। इसी योग में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जायेगा। उन्होंने बताया कि 101 वर्षों के बाद जयंती योग का संयोग बना है। साथ ही अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र व सोमवार तीनों का एक साथ मिलना अत्यंत दुर्लभ है।

By न्यूज़ डेस्क

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