बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 65वीं सेकेंड टॉपर रहने वाली चंदा भारती बांका की रहने वाली हैं। महिला वर्ग में वे अव्वल हैं। वे गया बुडको में असिस्टेंट इंजीनियर हैं। पिता विवेकानंद यादव गढ़वा में असिस्टेंट इंजीनियर हैं। मां का नाम कुंदन कुमारी है। चंदा भारती तीन भाई एक बहन हैं। हमने सेकेंड टॉपर चंदा भारती से बातचीत की।


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सवाल: आपको बहुत बहुत बधाई बीपीएससी में सेकेंड टॉपर और महिलाओं में अव्वल रैंक होने के लिए। आप तो सरकारी नौकरी में हैं ना?

जवाब: आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। हां, मैं गया नगर निगम में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर हूं।

सवाल: विषय आपने क्या रखा था वैकल्पिक विषय के तौर पर?

जवाब: मैंने सिविल इंजीनियरिंग रखा था।

सवाल: आपने ग्रेजुएशन किस विषय से किया?

जवाब: मैंने बीआईटी सिंदरी धनबाद से सिविल इंजीनियरिंग की है।

सवाल: आम तौर पर इंजीनियरिंग के स्टूडेट वैकल्पिक विषय में आर्ट्स रख लेते हैं। आपके मन में भी यह आया क्या?

जवाब: मुझे सिविल इंजीनियरिंग बहुत पसंद है। कॉलेज में भी गोल्ड मेडलिस्ट रही हूं। मेरे लिए टेक्निकल विषय ज्यादा आसान हैं।

सवाल: आपकी स्कूलिंग कहां से हुई?

जवाब: मैंने डीएवी पब्लिक स्कूल पाकुड़ से 10वीं और 12वीं डीपीएस बोकारो से किया।

सवाल: पिता जी की ट्रांसफरेबल नौकरी की वजह से अगल-अलग जगहों से पढ़ाई हुई?

जवाब: हां, मेरे पिता माइनर एरिगेशन गढ़वा में एसडीओ हैं। मेरी मां पाकुड़ में सरकारी शिक्षिका हैं। मैंने अपने मां के साथ रहकर 10 किया और फिर पढ़ने बाहर चली गईं।

सवाल: टॉपर्स के बारे में कहा जाता है कि वे खास किस्म के मेधावी होते हैं?

जवाब: जब तक रिजल्ट पब्लिश नहीं होता सभी सामान्य ही होते हैं। आंसर राइटिंग और बाकी स्किल की वजह से नंबर ज्यादा आ जाता है। मैंने यह हमेशा ध्यान दिया कि जितनी देर पढ़ो अच्छी तरह से पढ़ो। हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए। मेरे भाईयों ने हमेशा सपोर्ट किया।


सवाल: अपने भाईयों के बारे में बताएं?

जवाब: मेरे बडे़ भैया गृह मंत्रालय केन्द्र सरकार में हैं। मंझले वाले भैया जूनियर इंजीनियर पाकुड़ में हैं। सबसे छोटे वाले भाई दिल्ली मेट्रो में इंजीनियर हैं।
सवाल: एकेडमिक फैमिली होने का लाभ आपको मिला?

जवाब: हां, इसका लाभ हमें बहुत मिला। घर वालों ने खूब सपोर्ट किया। घर वाले हमसे ज्यादा आश्वस्त थे।

सवाल: इस बार यूपीएससी का जब रिजल्ट आया तो यह बात भी लोगों ने की कि नौकरशाह तो सरकार के इशारे पर काम करने वाले लोग होते हैं, फिर इतनी खुशी की क्या बात है?

जवाब: मुझे नहीं लगता कि ऐसा है। किस चीज को आप कैसे देखते हैं आपका परशेप्सन होता है। आपके पास पावर हो और आप लोगों के लिए सही तरीके से इसका इस्तेमाल करते हैं। मुझे जो प्लेटफॉर्म मिला है, वह बेहतर है। बिहार सरकार में रहकर काम करने का। जरूरी तबकों तक योजनाओं को पहुंचना मेरी प्राथमिकता है। मेरा नेचर ऐसा है कि मैं सही बात पर किसी के सामने झुकती नहीं हूं।

सवाल: बिहार जैसे प्रदेश में यह कहा जाता है कि नेतागिरी बहुत हावी रहता है। ऐसे में अच्छे मन वाले अफसरों को भी काम करने में कठिनाई होती है। आप क्या मानती हैं?

By न्यूज़ डेस्क

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