सवा दाे साल लगातार काेराेना के कारण आर्थिक रूप से कमजाेर हाे चुके अभिभावकाें के लिए निजी स्कूलाें की पढ़ाई भी हर साल महंगी हाेती जा रही है। जब पहली बार काेराेना का संक्रमण फैला था तब गिनती के कुछ स्कूलाें काे छाेड़ बाकी ने किस्ताें में ही, लेकिन पूरी फीस वसूल ली थी। काेराेनाकाल में क्लास रूम में पंखा नहीं चले थे, बल्ब नहीं जले थे, लेकिन बिजली का बिल तक वसूला गया।
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इसके बाद दाे साल हुए नामांकन में भी हर साल लगभग 5000 रुपये तक की वृद्धि कर दी। इसके साथ ट्यूशन फीस और डेवलपमेंट फीस भी बढ़ाकर ली जा रही है। सरकार का निर्देश सात प्रतिशत फीस वृद्धि का है, लेकिन ज्यादातर निजी स्कूल 10 से 15% तक वृद्धि कर रहे हैं। 2020, 2021 और 2022 में निचली कक्षाओं में हुए दाखिले पर नजर डालें ताे 2020 में ज्यादातर निजी स्कूलाें ने 30,000 रुपए का डिमांड ड्राफ्ट लिया था जबकि तब एक स्कूल ने 35,000 रुपये लिए थे।
2021 में इन स्कूलाें में दाखिले का शुल्क 5000 बढ़ गया था और यही वृद्धि इस बार भी हुई है। दूसरी तरफ पहले से पांचवीं कक्षा तक की ट्यूशन फीस में 10% तक वृद्धि हुई है। आईसीएसई बाेर्ड के एक बड़े निजी स्कूल की पहली कक्षा की ट्यूशन फीस 2021 में 2560 रुपये थी जाे इस बार 2810 रुपये हाे गयी है। एक बड़े सीबीएसई स्कूल की चाैथी अाैर सातवीं कक्षा की फीस में 700 रुपये (प्रत्येक कक्षा) की वृद्धि हुई है।

ज्यादातर निजी स्कूलाें ने किताब के लिए तय कर रखी हैं दुकानें
दाखिला शुल्क और ट्यूशन फीस से इतर अभिभावकाें की जेब किताबाें तथा काॅपियाें के कमीशन में भी कट रही है। ज्यादातर निजी स्कूलाें ने दुकान तय कर रखी है। किताबें उन्हीं दुकानाें में मिलती हैं। दुकानदार पूरा सेट तैयार रखते हैं जिसमें किताबाें के साथ काॅपियां भी रहती हैं। जाे अभिभावक यह नहीं जानते हैं कि काॅपी खुले बाजार से भी ले सकते हैं, वे स्कूल से तय दुकान से उसकी दर पर काॅपी प्रिंट रेट पर खरीदते हैं जबकि खुले बाजार में 25 से 30% तक की छूट मिलती है।
किताबें भी प्रिंट रेट पर मिलती हैं। अभिभावक प्रभात कुमार और मनीष कुमार शर्मा ने बताया कि उनके बच्चे एक बड़े आईसीएसई बाेर्ड में पढ़ते हैं। 15 दिनाें पहले उन्हाेंने किताबें खरीदीं ताे प्रिंट रेट पर मिलीं। घर आकर देखा कि किताब पर पुराने प्रिंट रेट पर अलग से बढ़े हुए रेट का स्टिकर चस्पा हुआ था।
स्कूलाें का दावा-मामूली वृद्धि हुई है
डीएवी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य आरसी शर्मा ने कहा कि उनके यहां वृद्धि हुई है, लेकिन सिर्फ सात फीसदी। इससे अधिक वृद्धि नहीं की गई है। किताब बाेर्ड की ही मिलती हैं, जिनके दाम सामान्य हैं। संत टेरेसा के वरीय शिक्षक नीलकमल राय ने कहा कि उनके यहां काेराना के दाैरान फीस वृद्धि नहीं हुई थी। इस बार मामूली वृद्धि हुई है।
