नवगछिया के खगड़ा गांव में दो मुंह वाला सांप दिखा. इसको देख हड़कंप मच गया. जब मजदूर घर के काम के ईंट उठा रहें थे, अचानाक खास किस्म के सांप को देख कर मजदूरों को डर समा गया. हल्ला सुन कर गृह स्वामी पन्नालाल सिंह मजदूर के पास पहुंचे. सांप को देख कर ठंडे के सहारे उसे डब्बे में रखा गया. उसके बाद स्थानीय वन विभाग के कर्मी को इसकी सूचना दी. मौके पर पहुंचे पीएन सिंह ने बताया कि यह सैंड बौया सांप है. आइए जानते हैं इसके बारे में.
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सैंड बोआ (sand boa) एक दुर्लभ सांप है. इसे भारत में कुछ जगहों पर इसे रेड सैंड बोआ सांप भी कहा जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में पिछले कुछ समय से सैंड बोआ (sand boa) का अवैध व्यापार काफी बढ़ गया है. इससे इस दुर्लभ सांप के विलुप्ति का खतरा बढ़ गया है. विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत में अवैध वन्यजीवों के व्यापार पर प्रतिबंध के बावजूद, आंध्र प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में दुर्लभ जीवों का भूमिगत कारोबार बे-रोकटोक जारी है. जिससे जैवविविधता को सबसे ज्यादा खतरा है. भारत में स्थानीय स्तर पर सैंड बोआ (sand boa) को ‘दो मुँह वाला सांप ’ (Two-Headed Snake) भी कहते हैं. वैसे इसका वैज्ञानिक नाम एरिक्स जॉनी (Eryx Johnii) है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सैंड बोआ की कीमत काफी अधिक है, इसीलिए इसका अवैध व्यापार होता है.
जानिए कहां होता है उपयोग
इस सांप का उपयोग कई प्रकार की दवाओं व सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में किया जाता है. इसके अतिरिक्त, कुछ लोगों का कहना है कि सैंड बोआ को जादू-टोने के लिए भी उपयोग किया जाता है. अन्य सापों की तरह सैंड बोआ भी मांसाहारी होते हैं. ये अधिकतर चूहे, छिपकली, मेढक, खरगोश आदि को अपना शिकार बनाते हैं. भारत में सैंड बोआ (sand boa) को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षण प्राप्त है. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची 4 के तहत सैंड बोआ सूचीबद्ध है. इस अधिनियम के तहत सैंड बोआ को पकड़ना या इसका व्यापार करना कानूनी तौर पर अपराध है.

