नवगछिया में प्रतिदिन गंगा नदी का जलस्तर बढ़ता दिख रहा है। कोसी ने भी कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जिले के नवगछिया अनुमंडल में कोसी का रौद्र रूप जारी है। इलाके के कई ऐसे पंचायत हैं जहां भीषण कटाव जारी है। बता दें इससे पूर्व खरीक प्रखंड के शिहकुंड गांव में लोगों ने कोसी नदी को कहर बरसाते हुए देखा था, जबकि कदवा दियारा में पिछले 1 सप्ताह से लगातार कटाव में बढ़ोतरी हो रही है। नदी की धारा गांव की ओर मुड़ गई है, जिससे यह घनी आबादी वाले क्षेत्र की ओर बढ़ता जा रहा है। अब तक कई एकड़ धन खेती जमीन कटकर कोसी में विलीन हो चुकी है, जिससे गरीब किसान के लिए यह चिंता का सबब बना हुआ है।

DM बोले- SOP के माध्यम से हो रहा है काम

बताया जा रहा है कि कटाव निरोधी कार्य के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है, जहां 20 मीटर बालू की बोरी डाल दी गई जो किसी भी तरह से असरदार नहीं है। जिओ बैग भी कटऑफ में धस चुका है। ग्रामीणों के भीतर अब भय सताने लगा है। बता दें कि प्रत्येक वर्ष भीषण कटाव का असर देखने को मिलता है। ग्रामीणों को घर छोड़कर अपने मवेशियों के साथ भटकना पड़ता है। कोसी के जलस्तर बढ़ने से जहांगीरपुर, बैसी रंगरा, मगरोनी खरी कुंड, लोकमानपुर, पहाड़पुर में भीषण कटाव होती है और किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि जलस्तर अभी काफी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि सारा काम SOP के माध्यम से किया जा रहा है।

क्या बोले फ्लड एक्सपर्ट

फ्लड एक्सपर्ट डॉ. विजय कुमार ने बताया कि प्रकृति के इस फेरबदल का मुख्य कारण स्वयं मानव ही है। लगातार इस तरह की समस्याओं का मुख्य कारण प्रकृति से खिलवाड़ करना है। उन्होंने बताया कि पहले मौसम में बदलाव समयानुसार होता था, जो देखते ही देखते कहीं ना कहीं इस कुचक्र के कारण बदलता दिख रहा है। इसका एक मुख्य कारण जनसंख्या में वृद्धि होना भी है। एक वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक सन 2000 से 2022 तक ग्लेशियर के पिघलने और भूमिगत जल के विदोहन से पृथ्वी की ऊपरी सतह बदल रही है, जिसके संकेत आम लोगों को भी दिख भी रहे हैं। बढ़ती आबादी की जरूरतों और सिंचाई के लिए भारी मात्रा में जमीन से पानी निकालने के परिणाम भयावह होने लगा है।

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By न्यूज़ डेस्क

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