बिहपुर : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर परफेक्ट टुटोरियल शिक्षण संस्थान के द्वारा स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें सफल दस मेघावी छात्रों को कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत मड़वा पूरव की मुखिया माननीय उषा निषाद जी के द्वारा पुरस्कृत किया गया। माननीय मुखिया उषा निषाद जी ने कहा की यह प्रतियोगिता परीक्षा हर साल आयोजित किया जाता है।

जिसका उद्देश्य गाँव के मेघावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के साथ स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह के संघर्ष साहित्य से वर्त्तमान पीढ़ी को अवगत कराना है। औलियाबाद ग्राम के स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह आजादी की लड़ाई में महात्मा गाँधी, डॉ राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, जयप्रकाश नारायण, शहीद जुब्बा सहनी जैसे कई राष्ट्रपटल के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चले थे। वीरो दादा आजाद दस्ता संगठन के एक मजबूत एवं निडर सैनिक थे। इन्हीं कारणों से हमेशा अंग्रेजों से टकराव बनी रहती थी। आजादी की लड़ाई में उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा और भागलपुर सेंट्रल जेल से पटना कैम्प जेल तक की यात्रा किया। वीरो दादा अपने साथी फौदी मंडल, कार्तिक साह, सुकदेव यादव, बाला दास के साथ मिलकर 1930 का बिहपुर सत्याग्रह, 1932 का झंडा यात्रा, 1943 का सोनवर्षा थाना शूट कांड जैसे चर्चित घटनाओं में मिलकर काम किया।

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह के परपोते सुजीत कुमार सुमन ने कहा की जिन्होंने आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया आज उसी के परिवार से वंशज होने का सबूत मांगा जा रहा है। जिस परिवार को जिला प्रशासन के द्वारा मान सम्मान दिया जाना चाहिए था, आज वही परिवार अपनी पहचान साबित करने के लिए दर – दर की ठोकरें खा रहा है। बिहपुर प्रखंड के औलियाबाद गाँव निवासी स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह की पोती प्रीति कुमारी एवं पोते सौरभ कुमार, छोटु कुमार को जिला प्रशासन के द्वारा उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है। पिछले कई वर्षों से अंचल से लेकर जिला तक का चक्कर लगा के थक चुके है। अब इनकी शिकायत उन्होंने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से की है।

स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह की 76 वर्षीय बेटी पाचो देवी अपनी व्यथा को सुनाते हुए कहती है की सन 1934 में जब महात्मा गाँधी बिहपुर दौरे पर कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे भूकंप रोधी कार्य को देखने के लिए आए थे तब उनकी माँ भागो देवी ने गाँधी जी के आवाहन करने पर जनकल्याण कार्य के लिए अपने सारे सोने – चाँदी के पुस्तैनी जेवरात उनको दान कर दिए थे। लेकिन आजादी के बाद उनको रहने के लिए एक घर तक नहीं है। मामले में स्वतंत्रता सेनानी वीरो सिंह के पुत्र हरेराम सिंह का बताना है की उनके पिता वीरो सिंह की मृत्यु बिमारी की वजह से ईलाज के अभाव में सन 1965 ई. को ही हो गया था। सन 1980 ई. के बाद उनकी माँ भागो देवी को स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना का लाभ भारतीय स्टेट बैंक के कृषि वाणिज्य शाखा झंडापुर , खाता संख्या P.48 से उनके मरणोपरांत 8 दिसम्बर 1989 ई. तक मिलता रहा। इस कार्यक्रम के दौरान सरपंच सुनीता देवी, स्वतंत्र शिक्षक संतोष मालाकार, शिक्षक आनंद कु सिंह, उपस्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. भीम सैनी, रोहित निषाद, पांडव कुमार सहित सैकड़ो छात्र छात्राएं एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

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By न्यूज़ डेस्क

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