नवगछिया : रंगरा में कोसी और गंगा का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है। इलाके में कोसी का जलस्तर शुक्रवार को 30.94 सेंमी है। जबकि खतरे का निशान 31.48 निर्धारित है। इसी तरह, गंगा का पानी शुक्रवार को 31.69 पर दर्ज किया गया। जबकि रंगरा में शुक्रवार को गंगा का जलस्तर, 31.60 सेमी. खतरे के निशान के पार रहा। दोनों नदियों के जलस्तर में कमी से गांवों में भी कटाव की चिंता सताने लगी है। क्षेत्र का मदरीना, सधुआ चापर, जहांगीरपुर बैसी, कौसकीपुर सहोरा एवं तिनटंगा पंचायतों में 1 से 2 सप्ताह पहले बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका था।
इनमें से मदरौनी एवं सधुआ चापर पंचायत की स्थिति दयनीय हो गई थी। वहीं, खरीक में गंगा नदी के जलस्तर में 04 सेमी की कमी आई है। गुरुवार को गंगा का जलस्तर 32.97 मीटर था। यह शुक्रवार को घटकर 32.93 हो गया है। जबकि कोसी का जलस्तर 31.18 मीटर पर स्थिर है। फिलहाल प्रखंड के किसी भी गांव में बाढ़ का खतरा नहीं है। प्रशासन कोसी और गंगा के पानी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
गंगा के जल स्तर में गिरावट के बाद भी गोपालपुर और इस्माइलपुर के ग्रामीणों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां अब भी कई घरों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। जिस कारण लोग ऊंचे स्थानों पर रहने को मजबूर हैं। जलस्तर में कमी की खबर से इन लोगों के चेहरे पर खुशी तो देखी जा रही है लेकिन कटाव और बीमारी फैलने का तनाव भी दिख रहा है। गंगा का जलस्तर शुक्रवार को 0.1 मीटर कम दर्ज किया गया है।

गुरुवार को गोपालपुर में गंगा 31.70 सेंमी पर बह रही थी। जो शुक्रवार को 31.69 पर है। वहीं, कोसी धीरे-धीरे कम हो रहा है। बीते गुरुवार को मदरौनी में कोसी 30.94 मीटर पर बह रही थी, जो शुक्रवार को स्थिर है। गंगा के जलस्तर में कमी आने से स्पर और बांधों पर खतरा मंडराने लगा है।
जलस्तर में कमी आने से कटाव होने लगता है। अब लोगों को पानी कम होने के बाद डायरिया, डेंगू का खतरा सताने लगा है। उधर, जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता मुकेश कुमार का कहना है कि कोसी का जलस्तर अभी स्थिर है। वही, गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है। प्रशासन लगातार स्पर पर नजर बनाए हुए हैं।

