धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में वर्षभर चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। गुप्त नवरात्रि साधना, तंत्र-उपासना, आध्यात्मिक उन्नति और देवी आराधना का विशेष पर्व है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धापूर्वक की गई पूजा और साधना का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
कब तक रहेगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि?
इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई 2026 (बुधवार) से शुरू होकर 23 जुलाई 2026 तक चलेगी। इन नौ दिनों में देवी के गुप्त स्वरूपों की विशेष आराधना की जाती है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई 2026 को सुबह 11:42 बजे प्रारंभ होकर 15 जुलाई 2026 को सुबह 8:20 बजे समाप्त होगी।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त:
- समय: सुबह 6:03 बजे से 8:20 बजे तक
- कुल अवधि: 2 घंटे 17 मिनट
गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की होती है पूजा?
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा का विशेष विधान है। इनमें शामिल हैं—
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुर सुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां त्रिपुर भैरवी
- मां छिन्नमस्ता
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
ऐसे करें घटस्थापना और पूजा
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर गंगाजल का छिड़काव करें। चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
इसके बाद मिट्टी या तांबे के कलश में स्वच्छ जल भरें, आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें। विधिपूर्वक कलश स्थापना के बाद अखंड दीप प्रज्ज्वलित करें। मां दुर्गा का ध्यान करें, दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और अंत में आरती कर पूजा में हुई त्रुटियों के लिए क्षमा याचना करें।
क्या है गुप्त नवरात्रि का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुप्त नवरात्रि में की गई साधना, जप, तप और देवी उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। यह समय आध्यात्मिक उन्नति, मनोकामना पूर्ति और देवी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
