नवगछिया :- नवगछिया अनुमंडल इन दिनों व्यापक स्तर पर नगदी की समस्या से जूझ रही है . नवगछिया अनुमंडल के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नोटों की भारी किल्लत बरकरार है. लोगों को सुलभता से नगदी नहीं मिल पा रही है. नोट के लिए लोगों को बैंक में घंटों लाइन में लगकर खड़ा होना पड़ता है. मुश्किल से दो या 3 घंटे में ही बैंक की नकदी समाप्त हो जाती है .लोग उम्मीद लगाए रहते उसे भी नगद मिल जाएंगे लेकिन 2 घंटे बाद केशियर और बैंक कर्मी हाथ खड़े कर देते हैं.
ऐसे हालात में लोगों की काम प्रभावित हो रही हैं .किसी को बेटी का ब्याह करना है. किसी को श्राद्ध करना है इसके लिए पैसे की जरूरत है बैंक में पैसे रहने के बावजूद भी भी पैसे नहीं मिल पा रहे हैं हम लोगों का जीना मुश्किल होता जा रहा है बैंकों की दिवालियेपन की हालत देख व्यवसाय लोग बैंक में पैसे जमा करना महफूज नहीं समझते अब व्यवसाई नगद रकम बारे बाहर ही बाहर जहां से सामान की खरीदारी करते हैं वहां भुगतान कर देते व्यवसाई व्यवसाई बैंक में पैसे जमा नहीं करते इससे नोटों की किल्लत और विकराल हो गई है। बीते 1 सप्ताह की बात करें तो लोगों को 7 दिन में मुश्किल से किसी एक दिन के कुछ घंटे पैसे मिल पाते हैं ऐसे में लोगों के घर गिरस्ती प्रभावित हो रही है नोटबंदी के बाद नोटों की किल्लत अभी भी विकराल है नवगछिया बाजार की बात करें नवगछिया के तमाम ATM गुरुवार को बंद पाए गए खरीक बाजार SBI की बात करें वहां भी नोटों की किल्लत बरकरार है एटीएम नोटबंदी के बाद एक भी ATM चालू अवस्था में नहीं है SBI ATM को खुलता ही नहीं बैंक में लोगों की लंबी कतार होती है ₹10000 से नीचे का भुगतान खरीक बाजार SBI शाखा में नहीं होता 10,000 से अधिक कार्यक्रम लेने वालों की लंबी कतार होती है फिर भी लोगों को देर शाम तक भी रकम नहीं मिल पाता आम लोग परेशान हैं शिकायत करने पर खरीक शाखा के प्रबंधक का कहना है कि नवगछिया और भागलपुर में भी नोट नहीं मिल पा रहे हैं जब नेट है ही नहीं काम कैसे होगा अगले दिन का इंतजार करिए हो सकता है नोट मिल भी जाए कहीं भी मिले ऐसी हालत है इस संदर्भ में पूछे जाने पर मकनपुर निवासी कांग्रेसी नेता चैनल सतीश सतीश चंद्र ठाकुर ने कहा नोटों की किल्लत केंद्र की भाजपा सरकार की उपज है केंद्र की सरकार ने जानबूझकर आम लोगों के जन जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है लोगों की जरूरत की काम में प्रभावित हो रही है राज्य समेत देश की की बैंकिंग व्यवस्था दिवालियेपन की स्थिति से जूझने लगी आगे क्या होगा कहना मुश्किल है यही हालत रही तो आने वाले समय में सरकार की मुश्किल मुश्किल में बढ़ेगी वित्तीय दिवालियेपन से जूझ रही केंद्र की भाजपा सरकार आगामी समय में वित्तीय आपातकाल की भी घोषणा कर सकती है कुछ भी हो सकता है कहना मुश्किल है.
