भागलपुर: बाल विवाह सामाजिक अभिशाप के साथ-साथ गैर कानूनी भी है। इसके उन्मूलन के लिए राज्य में बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006 प्रभावी है। इसके तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद गांव- मोहल्लों में चोरी छिपे नाबालिगों की शादी हो रही है।

लिहाजा बाल विवाह पर पूर्णरूपेण रोक लगाने के उद्देश्य से मंदिरों में होने वाली शादियों में वर-वधू की उम्र का सत्यापन करने को कहा गया है। इसके तहत मंदिर में पंडित उम्र संबंधी प्रमाण पत्र देखकर ही वर-वधू को सात वचन निभाने की शपथ दिलाकर फेरे दिलाएंगे। यही व्यवस्था काजी के साथ भी लागू होगी। वे भी निकाह कराने के पूर्व उम्र संबंधी प्रमाण पत्र का सत्यापन करेंगे। बाल विवाह निषेध कानून सभी धर्म पर लागू है। इसलिए सिख और इसाई भी इसकी परिधि में आएंगे।

दी गई है सलाह

राज्य सरकार ने शादी कार्ड छपाई, मैरिज हॉल, विवाह भवन और मंदिर की बुकिंग में भी उम्र का सत्यापन करने का निर्देश दिया है। विवाह में खान-पान की व्यवस्था हेतु कैट¨रग का कार्य करने वाले कैटरर द्वारा भी बुकिंग के पूर्व आयु प्रमाण पत्र का सत्यापन कराने की सलाह दी है।

बैंडबाजा और सजावट कार्य करने वालों को भी इसकी परिधि में लाया गया है। किसी भी स्तर पर चूक हुई तो सभी पक्षों को जिम्मेदार माना जाएगा। महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक ने बीडीओ, सीओ, थाना और अनुमंडल स्तर पर सभी को चौकस रहने को कहा है। ऐसे मामले में किसी भी शिकायत पर शादी कराने वाले दोषी माने जाएंगे।

इस संबंध में महिला विकास निगम के डीपीएम मनोज कुमार ने बताया कि महिला विकास निगम की प्रबंध निदेशक का निर्देश सभी डीएम को प्राप्त हुआ है। इसके तहत सभी पक्षों को इसका अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है।

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By न्यूज़ डेस्क

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