सीबीआई, रेलवे और पुलिस के अफसरों का क्रेज कहें या फिर कुछ और कि अब ठग और धोखेबाज भी इसकी खाल ओढ़े अपना धंधा चमकाने में जुटे हैं। संभव है कि किसी दिन आपका सामना ऐसे ही किसी फर्जी रौबदार अफसर से पड़ जाए।

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पहचानने में चूक हुई तो आप लुट जाएंगे। दरअसल बिहार में इन दिनों कई फर्जी अफसर घूम रहे हैं। फर्जी डीआरएम भी घूम रहे हैं। रौब ऐसी की उनके आगे असली अफसर भी फीके पड़ जाएं। ऐसे फर्जी अफसरों से देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी सीबीआई भी परेशान है। फर्जी सीबीआई अफसरों से परेशान असली सीबीआई ने तो बाकायदा लोगों को आगाह करने के लिए अपील तक जारी कर रखी है। सीबीआई को लगातार ऐसे फीडबैक मिल रहे थे कि कुछ ठग और धोखेबाज उसके नाम का बेजा इस्तेमाल कर आम लोगों और लोकसेवकों से पैसा वसूलने या लाभ लेने के चक्कर में घूम रहे हैं।

मजेदार बात यह है कि ठगों ने सीबीआई का लोगो वाला ई-मेल भी तैयार कर लिया था जिन पर सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों का नाम लिखा होता है। इससे इतर बिहार पुलिस ने पिछले सप्ताह पटना में एक फर्जी डीआरएम को गिरफ्तार किया है। सहरसा का रहने वाले इस फर्जी डीआरएम ने एक पुलिस वाले के बेटे से ही रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर 27 हजार रुपए ठग लिए थे।

ताजा मामला

पूर्व मध्य रेल का फर्जी डीआरएम बनकर बेरोजगार युवकों से नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले शातिर जियाउद्दीन को पटना पुलिस ने 20 जुलाई को गिरफ्तार किया है। सहरसा के रहने वाले जियाउल हसन उर्फ जियाउद्दीन को कोतवाली थाने और ईओयू की टीम ने डाकबंगला चौराहे के पास स्थित एक होटल के कमरा नंबर 503 से गिरफ्तार किया। जियाउल के पास से पुलिस ने 19 हजार नगद, दो मोबाइल, तकरीबन 10 स्टूडेंट के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, दो स्टाम्प पेपर सहित अन्य दस्तावेज बरामद किया है। जियाउल ने पटना जिला पुलिस बल के सिपाही के बेटे सद्दाम से हाजीपुर स्थित पूर्व मध्य रेलवे के दफ्तर में नौकरी दिलवाने के नाम पर 27 हजार रुपए की ठगी की थी। इस संबंध में सिपाही अब्दुल मुत्तलि ने कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया था। जियाउल पहले समस्तीपुर में रेलवे का पेटी कांट्रैक्टर था। बाद में वह दिल्ली चला गया और ठगी का काम करने लगा।

फर्जी सीबीआई भी

सीबीआई को ऐसी भी सूचना मिली थी कि सीबीआई ‘लोगो’ वाले कुछ ई-मेल भी जनता को भेजे जा रहे हैं। इसमें सीबीआई अधिकारियों का नाम भी लिखा होता है। ऐसे ई-मेल के जरिए फर्जी अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा धन लॉटरी, बैंक ट्रांसफर आदि के रूप में किए गए फंड ट्रांसफर, विदेशों में रोजगार व भुगतान जैसे विदेशी विनियमों को वैध होने का दावा किया जाता है। सीबीआई के अनुसार ऐसे ई-मेल व दस्तावेज धोखाधड़ी करके बनाए जाते हैं।

फर्जी सीबीआई अफसर को मुंबई में दबोचा था

मुम्बई सीबीआई ने नकली सीबीआई ऑफिसर बन पैसे एंठने वाले दो ठगों को गिरफ्तार किया था। एक राजेश रंजन पूर्वी चंपारण के हरदिया का रहने वाला और एमबीए था। दूसरा अश्विनी कुमार शर्मा दसवीं पास और हरियाणा के पानीपत का रहने वाला था। दोनों खुद को सीबीआई के अधिकारी के रूप में पेश करते थे और व्यवसायियों व फिल्मी हस्तियों को गिरफ्तारी और छापेमारी का भय दिखाकर रकम ऐंठ लेते थे। सीबीआई के अनुसार राजेश एल.एन.मिश्र इंस्टीच्यूट ऑफ इकोनॉमिक डेवपलपमेंट से एमबीए की डिग्री लेकर अरविन्द मिल्स (बांद्रा) में सेल्स ऑफिसर की नौकरी कर रहा था। इसके पहले वह कई निजी कंपनियों में काम कर चुका था। मुम्बई में वह कई लोगों से नौकरी के नाम पर पैसे भी ले चुका था। उसने अश्विनी कुमार शर्मा को टॉप सीबीआई ऑफिसर के रूप में लोगों के सामने पेश करना शुरू किया और की बड़ी फिल्मी हस्तियों व व्यवसायियों से मोटी रकम ऐंठ ली।

पकड़े गए हैं अफसर

अररिया पुलिस ने फारबिसगंज में जनवरी 2012 में नकली सीबीआई टीम के सदस्यों को गिरफ्तार किया था। ये ठग सरकारी दफ्तरों व व्यवसायियों से पैसे की उगाही में जुटे थे।

क्या है मोडस आपरेंडी

सरकारी अफसर की खाल ओढ़े शातिर बदमाश आमतौर पर लोगों को अपना परिचय पत्र नहीं दिखाते लेकिन ठसक ऐसी की सामने वाला असली अफसर मान ठगा जाता है।

किया है आगाह

सीबीआई ने ऐसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यह भी कहा है कि ऐसे लोगों से पहचान के सबूत जरूर मांगे। इस संबंध में शंका होने पर सीबीआई नई दिल्ली के फोन नंबर 011-24362755 पर संपर्क किया जा सकता है।

By न्यूज़ डेस्क

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