नवगछिया : आशीष कुमार, एनसीईआरटी किताबों की अनिवार्यता से कमीशन के रूप में मिलने वाली आमदनी को कम होते देख स्कूल संचालकों ने नई तरकीब निकाल ली है। निजी प्रकाशकों से मोटा कमीशन मिलता रहे, इसके लिए छात्रों के किताबों की सूची में कई ऐसे किताब शामिल कर दिया गया है, जिसका कक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है।

अभिभावकों द्वारा बच्चों के लिए खरीदी जा रही किताबों में कई किताबें ऐसी हैं, जिनका उनके पाठ्यक्रम से कोई लेना देना नहीं है। संचालकों द्वारा यह कारनामा केवल इसलिए किया गया है। ताकि उन्हें निजी प्रकाशकों के जरिए मिलने वाले कमीशन में कोई कमी नहीं आए।

एक पाठ्यक्रम की डबल किताब

स्कूल संचालक एनसीईआरटी को किताब को गुणवत्ताविहीन करार देते हुए अभिभावकों पर किताब के लिए दोहरा भार डाल रहे हैं। अभिभावकों को स्कूलों के दबाव में एनसीईआरटी के अलावा उसी विषय की निजी प्रकाशक की किताब भी खरीदना पड़ रहा है।

एक पर भारी एनसीईआरटी की 5 किताब

अभिभावकों के साथ स्कूल संचालकों की लूट का अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि निजी प्रकाशक की एक किताब की कीमत एनसीईआरटी की सभी पांच किताबों के बाहर है। एनसीईआरटी की एक किताब की अधिकतम कीमत जहां मात्र 50 रुपए है। वहीं दूसरी ओर से निजी प्रकाशक की छोटी से छोटी किताब की कीमत 250 रुपए से अधिक है। इस तरह से अभिभावकों को छात्रों की किताब पर चार से पांच गुना अधिक कीमत देना पड़ा रहा है।

इस तरह लादी गई हैं अतिरिक्त किताबें

– कक्षा छह के बाद हर कक्षा में नॉवेल की किताब शामिल

– गणित की किताब के अलावा प्रैक्टिस बुक भी किया शामिल

– साइंस की किताब के अलावा प्रैक्टिस बुक भी किया शामिल

– अंग्रेजी में ग्रामर की किताब के अलावा ग्रामर की प्रैक्टिस बुक

– कंप्यूटर में भी मुख्य किताब के अलावा एक प्रैक्टिस बुक शामिल

 

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By न्यूज़ डेस्क

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