ढोलबज्जा : चौसा थाना के लौआलगान पंचायत अंतर्गत बाबा बिशु राउत स्थान समीप घघरी धार में शुक्रवार की अहले सुबह अज्ञात शिकारियों द्वारा नदी में मछली मारने के लिये दिया गया जहर को गरुड़ ने खा लिया. विष पान से तुरंत गरुड़ तड़पते हुए बेहोश होकर जमीन पर गिर गए. वही कुछ मजदूर के साथ खेतों में काम करने जा रहे गंगानगर कदवा निवासी ज्योतिष कुमार सिंह ने घघरी धार में देख, उसे बेहोशी की हालत में उठाकर बाबा बिशु राउत मंदिर लाया. उसे ठंड का भी कुछ असर था. जहां जूट की बोरी जलाकर आग के पास गरुड़ को गर्मी देने की कोशिश की.
लेकिन किसी तरह गरुड़ को होश आते ना देख पक्षी प्रेमी ज्योतिष कुमार सिंह ने अपने सीने में सटा कर उस गरुड़ को 4 किलोमीटर पैदल कदवा प्रभात खबर प्रतिनिधि के पास पहुंचा गया. जहां प्रभात खबर प्रतिनिधि द्वारा तुरंत इसकी सूचना गरुड़ एक्सपर्ट जयनंदन मंडल व चिकित्सक डॉ नगीना राय को दिया गया. जब तक वह आते, तब तक गरुड़ पर ठंड का असर को देख ग्रामीणों के सहयोग से अलाव की व्यवस्था कर उसे फिर से आग की सेक लगाए जाने के बाद गरुड़ उठने की अपनी हिम्मत दिखाने लगी. उसके बाद डॉक्टर नगीना राय ने मौके पर पहुंचकर उसे अपने घर ले गया.
जहां प्राथमिक उपचार के बाद अभी गरूर ठीक हैं. डॉक्टर नगीना ने बताया कि घंटे के अंतराल पर गरुड़ को दो-दो सुई लगाया जा रहा है. जिसे खाने के लिए प्रयाप्त मछली की व्यवस्था की गई है. अभी गरुड़ अपने से खड़ा होकर चल फिर पा रहे हैं. वही ग्रामीणों ने इस विलुप्तप्राय पक्षी गरुड़ पर गंभीरता से ध्यान देने की अपील संबंधित क्षेत्र के पुलिस प्रशासन व सरकार से कर रहे हैं.

मालूम हो कि अगले साल भी कदवा दियारा पंचायत अंतर्गत कंचनपुर कदवा समीप मारा धार में अज्ञात शिकारियों के द्वारा बंसी में लगाए गए मछली को गरुड़ द्वारा खा लिए जाने के बाद, उस समय भी गरुड़ के कंठ में बंसी का कांटा फंस गया था. जिसे बचाने के लिए स्थानीय लोगों की मदद से उस घायल गरुड़ को सुंदरवन भागलपुर भेजा गया था. जहां उसे बचाने में विभाग को करीब 27,000 रुपए की राशि खर्च हुई थी. गरुड़ के इस प्रवासी इलाका यानि कदवा के आसपास यदि पहेलियां व शिकारियों पर अंकुश नहीं लगाई गई तो धीरे धीरे यहां से भी इस दुर्लभ पक्षी का प्रवास खत्म होने की आशंका हो बढ जायेगी.


