नवगछिया : श्री शिवशक्ति योगपीठ नवगछिया के तत्वावधान मे आयोजित दो दिवसीय नौवा गुरु पूर्णिमा महोत्सव बनारसी लाल सरार्फ महाविद्यालय में परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के सानिध्य मे गुरुवार को सुबह सात बजे वेदीपूजन के साथ शुरू हुआ. कार्यक्रम के प्रथम दिन स्वामी जी द्वारा लगभग तीनो सौ नये लोगों को दीक्षित किया गया. इस अवसर पर बनाये गए विशाल प्रशाल में तीन धर्म मंच पर संगीत के नामचीन कलाकारों के द्वारा दोपहर से ही गीत संगीत की प्रस्तुति की जा रही थी. इस अवसर पर भारतनाट्यम नृत्य कर नन्ही कलाकार सरस्वती ने सबो का दिल जीत लिया. दिव्यांग संस्था के कलाकारों ने कत्थक नृत्य कर सबो का मन मोहा.
गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया उद्घाटन
कार्यक्रम के उत्तरचरण में दीप प्रज्वलित कर मंच का उद्घाटन भागलपुर प्रक्षेत्र के डीआईजी विकास वैभव, सांसद शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, पूर्व सांसद अनिल यादव, लोकायुक्त संस्थान के आईपीएस अधिकारी अभयलाल, विधानपार्षद संजीव कुमार सिंह, ई शैलेन्द्र, पूर्व कुलपति रमाशंकर दुबे, एसडीओ मुकेश कुमार, एवं डीपीसी प्रवेन्द्र भारती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करके किया. डीआईजी विकास वैभव ने इस आयोजन की सराहना करते हुए जीवन में गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला. इसके अलावा गणमान्य अतिथियों ने गुरु शिष्य संबंध के साथ गुरू पूर्णिमा के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि इस आधुनिक एवं डिजिटल युग मे चित के शांति के लिए एवं इस माया कि दुनिया से मुक्ति का राह सद्गुरु ही बताते है. मनुष्य को अपने जीवन मे सच्चे गुरु कि पहचान कर जीवन को सफल बनाना चाहिए.

बाबा ने कहा महर्षि वेदव्यास को समर्पित है यह गुरू पूर्णिमा
परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज ने अपने मुखारविंद से गुरु पूर्णिमा चारो वेदों के रचियता व्यास जी को समर्पित है. उन्हीं के जन्मोत्सव पर यह पर्व मनाया जाता है. जीवन मे अहंकार त्याग करना चाहिए ताकि जीवन को भगवान एवं गुरू के बताए सदमार्ग, सत्यकर्म एवं मानवता के सेवा मे समर्पित करना चाहिए यही जीवन का सार है तभी मानव जीवन सफल और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होगा. साथ ही विभिन्न जिला से स्वामी जी के अनुयायी का कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है. जहां श्री शिव शक्ति योग पीठ के सेवा दल एवं सेवार्थ संस्था के सदस्य साथ ही अन्य जगह से आए हुए सेवा दल अतिथियो की स्वागत में तत्पर दिखे. बताया जाता है कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिए आमलोगो के साथ महाविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारी भी सहयोग कर रहे थे.


