ऋषव मिश्रा कृष्णा, नवगछिया : जमालदीपुर का धारो सिंह उर्फ धरबा नवगछिया के अपराध की दुनियां का भले ही एक नया नाम हो लेकिन महज एक वर्ष में ही उसने दहशत का ऐसा माहौल पैदा किया कि लोग उसके नाम से ही कांपने लगे. सनक मिजाज और मनबढ़ू प्रवृति का होने के कारण गांव के लोग पिछले कई वर्षों से धरबा से परहेज करने लगे थे. गांव के लड़कों के बीच मारपीट, मस्ती में आगे बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाला धरबा तीन वर्ष पहले ही गांव में भय का माहौल बना चुका था. गांव के एक छोटे से गिरोह को संगठितकर धरबा ने कोसी दियारा की ओर रूख किया. सूत्र बताते हैं कि उस समय धरबा अपराध की दुनियां में छा जाने को बेताब था. लेकिन उसके पास संसाधन यानीहथियार की कमी थी. कोसी दियारा में धरबा के गिरोह से प्रभात यादव की दोस्ती हुई, प्रभाष से दोस्ती कराने में धरबा के गिरोह के ही सुशील यादव की बड़ी भूमिका रही. उस समय बेलोरा बहियार में बुल्लन यादव गिरोह की चलती
थी. बुल्ल्न का करीब 25 वर्षों का आपराधिक इतिहास था.
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– दो नाली बंदूक के लिए ही कर दी थी सुशील यादव की हत्या
– मनबढ़ू व सनकी प्रवृति का है धरबा
जातिगत हिंसा के दौड़ में बुल्लन फैजान गिरोह की कमान को संभाल चुका था. इन दिनों वह दियारा में बड़े भू भाग पर कब्जा जमाये हुए था. बुल्लन की बादशाहत पर शैलेश सिंह हत्याकांड में फरार चल रहे प्रभाष यादव की नजर थी. बुल्लन के रहते कोसी उसकी नहीं हो सकती थी. प्रभाष ने धरबा समेत उसके गिरोह के सुशील यादव, राजेश चौधरी आदि को बुल्लन की सुपाड़ी थी और आपराधिक दुनियां में पूरी तरह से स्थापित कर देने का आश्वासन भी दिया. इसके बाद एक साजिश के तरह धरबा का गिरोह बुल्लन यादव के गिरोह में जा मिला. फिर एक दिन सुनियोजित तरीके से बुल्लन के साथ पहले बैठक कर सबों ने शराब पिया और उसकी हत्या कर उसकी दो नाली बंदूक ले कर भाग गया. बुल्लन की हत्या पिछले वर्ष जनवरी माह में की गयी थी. धरबा को कोसी में दादागिरी करनी नहीं थी,वह अपने सभी लड़कों के साथ गांव आ गया और गंगा दियारा की आपराधिक शक्ति शून्यता का फायदा उठाते हुए विभिन्न आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हो गया.

लेकिन धरबा के गिरोह को उसकी रहनुमाई कतई पसंद नहीं थी, इसका कारण यह था कि धरबा मनबढ़ू और सनकी प्रवृति का था. वह किसी की सुनता नहीं था. इसी कारण बुल्लन की दो नाली बंदूक को लेकर धरबा का विवाद उसके ही गिरोहके सुशील सिंह से हो गयी. अंतत: धरबा ने सुशील को मार गिराया. इसके बाद पूरा गिरोह धरबा की बादशाहत स्वीकार कर चुका था. इन दिनों इस गिरोह का एक ही मकसद धन और हथियार इकट्ठा करना था.
पप्पू पासवान व हरियौ के अजय पासवान जैसे अपराधियों से सांठ गांठ कर धरबा अपने गिरोह को नया आकार देने के फिराक में था. पि ले दिनों धरबा ने सिरगिट्टी साह की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि वह सिरगिट्टी साह की पत्नी से प्रेम करने लगा था. कहा जा रहा है कि उसने सिरगिट्टी की पत्नी से शादी भी कर चुका है. धरबा की गिरफ्तारी के बाद खास कर बिहपुर और खरीक के सिमांत क्षेत्र के दस गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि उसके गिरोह के अन्य अपराधी अभी भी फरार चल रहे हैं. लेकिन पुलिस का दावा है कि जल्द ही सबों को सलाखों के पीछे भेज दिया जायेगा.

