नवगछिया :  रूप कुमार , मीलों दूर फैले इलाके में कास और झौवा के जंगल। नीलगाय और जंगली सुअरों का आतंक…वहां जाने के लिए गंगा या कोसी नदी पार करने के बाद जंगल व गर्म रेत पर कई किलोमीटर चलना होगा। वहां पहुंच भी गए तो वापस आना मुश्किल, क्योंकि यहां है अपराध की एक भयानक दुनिया..गंगा और कोसी का दियारा इलाका। जी हां, गंगा व कोसी नदी से निकली किसानों की हजारों एकड़ जमीन (दियारा), जिस पर अपराधियों का कब्जा है। इसके बाद भी सुरक्षा का बीड़ा उठाने वाली पुलिस कार्रवाई तो दूर, वहां जाने के नाम से ही कांप उठती है।

कुख्यात पुलिस को खुलेआम देते हैं चुनौती:दियारा के कुख्यात खुलेआम पुलिस को चुनौती देते हैं। हिम्मत है तो यहां तक आकर दिखाए। भास्कर की टीम ने दियारा की इस निर्मम हकीकत को सामने लाने के लिए तीन दिन और और दो रातें उसी बीहड़ में गुजारीं। भागलपुर की सीमा से सटे मुंगेर के बरियारपुर से होते हुए खगड़िया, मधेपुरा से लेकर कुरसेला के पांच जिलाें से गुजर रही गंगा व कोसी दियारा की खाक छानी। करीब 350 किलोमीटर के इलाके का दौरा किया। और फिर दियारा के आतंक की पूरी कहानी अपराधियों की मांद में घुसकर निकाल लाई। जहां 45 से अधिक दियारा के इलाकों में 60 से अधिक गैंग सक्रिय हैं। जानिए दियारा के आतंक की कुछ कहानियां।

घोड़ा और बंदूक वाले किसान ही ले जा पाते हैं अपनी फसल:दियारा में वही किसान अपनी जमीन से फसल घर ले जाते हैं, जिनके पास हथियार के साथ घोड़ा हो। बाकी किसान तीन-चार कोस दूर से ही अपनी जमीन की ओर इशारा कर दिखाते हैं- वह दोगच्छी देख रहे हैं, वही हमारी जमीन है। कोई कास तो कोई झौवा के जंगल दिखाकर अपनी जमीन की पहचान कराते हैं। दियारा की भयावहता पर लोग बताते हैं कि अगर वहां रहते हैं तो वह केवल उस इलाके के कुख्यात बदमाश। वे लोग वहां अपना बासा बनाकर रहते हैं, जहां सारी व्यवस्था रहती है।

अपराधी से मुखिया बन गए, अब लगाते हैं जनता दरबार:दियारों में आतंक का पर्याय रहे कई अपराधी अब मुखिया बन गए हैं। उनके इलाके के लोग न्याय के लिए थाना व कोर्ट की शरण में नहीं जाते, बल्कि मुखिया बने अपराधी के दरबार में जाते हैं और वहां केस की सुनवाई होती है और मामला रफा-दफा। बाढ़ के पहले और बाद का समय उन कुख्यातों के लिए धंधे का सबसे अच्छा समय होता है। इस दौरान बिना कुछ किए एक-एक अपराधी की पांच से दस लाख रुपए तक की कमाई होती है। जमीन पर कब्जे का यह सिलसिला दशकों से चल रहा है।

जमीन पर हक जताने पर मिलती है मौत:अगर किसी किसान ने अपनी जमीन अौर फसल पर मालिकाना हक दिखाने की हिमाकत की तो मौत निश्चित है। हत्या का तरीका भी काफी नृशंस होता है। अपराधी पहले किसान के हाथ-पांव बांधकर चाबुक से बेरहमी से पीटता है। जब वह अधमरा हो जाता है तो उस पर गोलियां बरसाईं जाती हैं। इसके बाद गंगा या कोसी नदी के किनारे लाकर उसके कई टुकड़े कर नदी में फेंक देता है, ताकि कोई सबूत नहीं बच सके।

 इलाके की एसपी निधि रानी से इस बारे में सीधी बात की

सवाल: नवगछिया के फरार अपराधियों को पुलिस क्यों नहीं पकड़ पा रही?

जवाब: पुलिस कोशिश कर रही है। एसटीएफ की भी मदद ले रही है।

सवाल: वे तो क्षेत्र में हैं?
जवाब: हां, हो सकते हैं। पुलिस ने भी दियारा क्षेत्र में कई बार कार्रवाई की है।

सवाल: दियारा में पुलिस नहीं पहुंच पाती?
जवाब:पुलिस पहुंचती है। लेकिन क्षेत्र दुर्गम है।

सवाल: फिर कैसे भाग जाते हैं?
जवाब:दियारा की नदियों के पार दूसरे जिले हैं। बदमाश नाव से दूसरे जिले में घुस जाते हैं।

सवाल: बदमाश घोड़े, मॉर्डन हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं। क्या पुलिस के पास यह सब नहीं है?
जवाब:पुलिस भी घोड़े का इस्तेमाल करती है।

सवाल: और हथियार?
जवाब:दियारा में जो ऑपरेशन हुए हैं उनमें एक भी मॉर्डन हथियार नहीं मिले। आपके पास कोई सूचना या तस्वीर हो तो हमें दें

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By न्यूज़ डेस्क

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