खरीक : प्रखंड के मध्य विद्यालय लोकमानपुर मे एक माह से ग्रामीणों द्वारा की गई तालाबंदी और प्रधानाध्यापिका की शिकायत पर बुधवार को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सर्व शिक्षा अभियान भागलपुर मधुसूदन पासवान लोकमानपुर विद्यालय पहुंचे. इस क्रम में उनके साथ साधनसेवी रामरतन, सीआरसीसी विद्या सागर एवं शिक्षा विभाग के लिपिक रघुकुल तिलक भी थे. पदाधिकारी ने स्कूल का ताला खुलवाकर ग्रामीणों और प्रधानाध्यापिका लोतिका आचार्य दोनों के पक्ष को सुना. मौके पर कुछ ग्रामीणों ने पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन करते हुए प्रधानाध्यापिका द्वारा बेंच डेस्क के पैसे का गबन किए जाने का मामला उठाया. इस पर प्रधानाध्यापिका ने कहा कि बेंच डेस्क बनकर तैयार है चौकी विद्यालय में तालाबंदी है इसी कारण से बेंच डेक्स विद्यालय नहीं लाया गया है.


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पदाधिकारियों ने कारपेंटर के यहां स्कूल के लिए बनाए गए बेंच और डेक्स का भी मुआयना किया. ग्रामीणों ने कहा कि वे लोग नहीं चाहते कि पुनः प्रधानाध्यापिका लतिका आचार्य विद्यालय में पदभार ग्रहण करें. इनका ट्रांसफर कहीं अन्यत्र करा दिया जाए फिर वह लोग अपना प्रदर्शन समाप्त करते हुए विद्यालय का ताला खोल देंगे. मौके पर कार्यक्रम पदाधिकारी मधुसूदन पासवान ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की जांच की है ना और रिपोर्ट वरीय पदाधिकारियों को सौंपेंगे इसके बाद वरीय पदाधिकारियों के आदेश पर ही कार्यवाही की जाएगी. ग्रामीणों ने पुनः विद्यालय में तालाबंदी कर दिया. मालूम होगी यहां पर मामला दो प्रधानाध्यापकों के बीच में प्रभार को लेकर फंसा हुआ है.

प्रधानाध्यापिका लतिका आचार्य लंबे समय से विद्यालय में कार्यरत थी. उनके विरुद्ध तरह-तरह की अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों द्वारा किए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद वरीय पदाधिकारियों के आदेश पर विद्यालय के शिक्षक रोहित शर्मा को विद्यालय का नया प्रधानाध्यापक बनाया गया. कुछ दिनों के बाद ही विद्यालय की पूर्व प्रधानाध्यापिका विद्यालय में प्रधानाध्यापक पद पर योगदान देने के लिए पदाधिकारियों के आदेश पर पहुंच गई. इसके बाद ग्रामीण आक्रोशित हो गए और विद्यालय में अस्थाई रूप से तालाबंदी कर दी.

बताया जा रहा है कि विद्यालय में करीब 1 माह से तालाबंदी जारी है. इधर शिक्षक नेता योगेश कुमार ने इस मामले में कहा है कि किसी भी सूरत में विद्यालय को बंद करना जायज नहीं है. यह असंवैधानिक और लोकतांत्रिक है. अगर पूर्व प्रधानाध्यापक का के विरोध में ग्रामीणों के पास शिकायत है तो पदाधिकारी उसका जांच करेंगे और कर भी रहे हैं. ऐसी स्थिति में इस मामले में ग्रामीणों को कब से काम लेना चाहिए और किसी भी सूरत में अपने ही बच्चों के पठन पाठन को बाधित नहीं करना चाहिए. शिक्षा विभाग से उम्मीद की जाती है कि इस प्रकरण में सख्त कदम उठाते हुए विद्यालय को सुचारु रुप से संचालित करवाने की दिशा में पहल करेगा.

 

By Rishav Mishra Krishna

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