नवगछिया। रंगरा प्रखंड के सधुआ गांव में बाढ़ ने 30 से अधिक परिवारों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी है। घरों में पानी घुस जाने के बाद ग्रामीण अपना घर-बार छोड़कर कटारिया रेलवे स्टेशन परिसर में शरण लेने को मजबूर हैं। स्टेशन परिसर में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग प्लास्टिक व तिरपाल के सहारे किसी तरह रात गुजार रहे हैं। वहीं, भोजन, पीने का पानी, बच्चों की सुरक्षा और मवेशियों के चारे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
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ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे स्टेशन उनका स्थायी ठिकाना नहीं है, बल्कि बाढ़ की मजबूरी ने उन्हें यहां रहने के लिए विवश कर दिया है। खुले परिसर में तिरपाल लगाकर रह रहे परिवारों की परेशानी बारिश के दौरान और बढ़ जाती है। तिरपाल से पानी टपकने के कारण बच्चों और बुजुर्गों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हर साल बाढ़ में छोड़ना पड़ता है घर

अमित कुमार सिंह, घुटर सिंह, जया देवी, खुशी कुमारी, सुलेखा देवी और प्रमिला देवी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि सधुआ गांव के लोगों के लिए बाढ़ हर साल बड़ी मुसीबत बनकर आती है। पानी बढ़ने के साथ उन्हें घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
रेलवे ट्रैक के पास बच्चों की सुरक्षा बनी चिंता
कटारिया रेलवे स्टेशन परिसर में शरण लेने के बाद सबसे बड़ी चिंता बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। रेलवे ट्रैक के समीप रहने के कारण ट्रेन गुजरने के समय परिजन अपने बच्चों को अपने पास बैठाकर रखते हैं। ग्रामीणों को लगातार डर बना रहता है कि कहीं खेलते या इधर-उधर जाते समय कोई बच्चा रेलवे ट्रैक की ओर न चला जाए।
मवेशियों के चारे का भी संकट
बाढ़ के कारण सिर्फ इंसानों के सामने ही भोजन का संकट नहीं है, बल्कि मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। घर और आसपास के खेत पानी में डूब जाने के कारण पशुओं के लिए हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पशुचारा उपलब्ध कराने की मांग की है।
राहत और सुरक्षित आश्रय की मांग
बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से सुरक्षित आश्रय स्थल उपलब्ध कराने के साथ भोजन, पीने का पानी, तिरपाल, शौचालय, रोशनी और पशुचारा मुहैया कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं पहुंचाई गई तो आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल एक टीम भेजकर बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लेने और उन्हें रेलवे परिसर से किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की अपील की है। उनका कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान घर उजड़ते हैं और परिवारों को विस्थापित होना पड़ता है। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हो पाई है।
इस संबंध में प्रभारी अंचलाधिकारी प्रवीण कुमार वत्स से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
