नवगछिया। गंगा और कोसी नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने नवगछिया अनुमंडल में बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। गोपालपुर, रंगरा और इस्माईलपुर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों, आंगन और खेतों में फैल गया है। पानी से घिरे परिवारों के सामने सुरक्षित ठिकाने की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कई परिवार सड़क किनारे प्लास्टिक टांगकर बच्चों और मवेशियों के साथ रहने को मजबूर हैं।
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रंगरा थाना क्षेत्र की तिनटंगा दियारा उत्तरी पंचायत के उसरहिया गांव में ग्रामीण पिछले 20-25 दिनों से बाढ़ की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कई प्रभावित परिवारों को अब तक प्लास्टिक सीट तक उपलब्ध नहीं हो सकी है। वहीं, पीने के पानी के लिए पर्याप्त चापाकल की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी और बढ़ गई है। पिंकी देवी, महादेव मंडल, उषा देवी और गोपाल मंडल समेत कई ग्रामीण राहत सामग्री और जरूरी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।
पुराना रेल बांध टूटा, तेजी से फैलने लगा पानी
इधर, गुरुवार देर रात रंगरा प्रखंड के मुरली गांव के पास पुराना रेल बांध करीब 15 मीटर तक टूट गया। बांध टूटते ही कोसी नदी का पानी तेजी से बनिया और साधोपुर की ओर फैलने लगा। इससे भवानीपुर, मसूदनपुर बैसी और जहांगीरपुर बैसी समेत आसपास के इलाकों में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया।

इसी रात कलबलिया बांध टूटने से स्थिति और चिंताजनक हो गई। पानी के तेजी से फैलने के बाद ग्रामीण अपने घरों से जरूरी सामान, अनाज और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए। अचानक आई इस आफत के कारण गांवों में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है।
ग्रामीणों की बढ़ी परेशानी
ग्रामीण राजू यादव, लाल यादव, रामप्रवेश यादव और विक्टर मंडल ने बताया कि गंगा और कोसी के बढ़ते पानी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। कई इलाकों में घरों तक पानी पहुंच चुका है और लोगों को अपने परिवार के साथ मवेशियों की भी चिंता सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बढ़ते पानी के बीच उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कहां जाएं और अपने परिवार को कैसे सुरक्षित रखें।

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी रोकने और राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, जलस्तर में कमी नहीं आने से लोगों की मुश्किलें बनी हुई हैं।
पांच पंचायतों के पांच हजार परिवार प्रभावित
गोपालपुर के अंचलाधिकारी रौशन कुमार ने बताया कि प्रखंड की पांच पंचायतों के करीब पांच हजार परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक किचन की व्यवस्था की गई है। राहत और बचाव कार्य के लिए आठ नावें लगाई गई हैं। इसके अलावा मेडिकल टीम और जरूरी दवाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।
बावजूद इसके, बाढ़ प्रभावित परिवारों की परेशानी कम नहीं हुई है। कई लोग अब भी सुरक्षित ठिकाने, पीने के पानी और राहत सामग्री के इंतजार में हैं। गंगा और कोसी का पानी लगातार लोगों की परीक्षा ले रहा है और हर गुजरते घंटे के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिंता बढ़ती जा रही है।
